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पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की बजाय ग्राहक क्यों पसंद कर रहे हैं CNG कारें, नई कार खरीदने से पहले पढ़ें यह खबर

Thu, 05 Nov 2020 04:39 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीएनजी वाहनों की बिक्री में 7 फीसदी का इजाफा हुआ है। चालू वित्त वर्ष में 117000 यूनिट की बिक्री हुई है। पिछले 5-7 सालों में सड़कों पर सीएनजी वाहनों की संख्या 22 लाख से 34 लाख तक पहुंच गई है...
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CNG Cars India - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश के कई शहरों में पेट्रोल के कीमतें 87 रुपये प्रति लीटर को पार कर चुकी हैं, वहीं डीजल के दाम 76.86 रुपये तक पहुंच चुके हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते बाजार में सीएनजी वाहनों की बिक्री रफ्तार पकड़ रही है। इसका फायदा ऑटो कंपनियों को मिल रहा है और वे गाड़ियों में फैक्टरी फिटेड सीएनजी गाड़ियों को बढ़ावा दे रही हैं। हाल ही में मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा कि सीएनजी गाड़ियों की मांग 50 फीसदी तक बढ़ी है। वहीं मांग को देखते हुए कंपनी सीएनजी गाड़ियों का प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है।

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सड़कों पर 34 लाख सीएनजी कारें

आंकड़ों के मुताबिक पैंसेजर व्हीकल्स की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी घटी है, वहीं सीएनजी वाहनों की बिक्री में 7 फीसदी का इजाफा हुआ है। चालू वित्त वर्ष में 117000 यूनिट की बिक्री हुई है। पिछले 5-7 सालों में सड़कों पर सीएनजी वाहनों की संख्या 22 लाख से 34 लाख तक पहुंच गई है। कम रनिंग कॉस्ट और सीएनजी पंपों की सुलभता इसकी बड़ी वजह है। मारुति सुजुकी ने हाल ही में एलान किया कि उसने पिछले वित्त वर्ष में 106443 फैक्टरी फिटेड सीएनजी गाड़ियों की बिक्री की। मारुति सुजुकी की कुल बिक्री में सीएनजी गाड़ियों का हिस्सा 13.5 फीसदी तक है, जबकि ह्यूंदैं में यह संख्या सात फीसदी है।

बाकी कंपनियां भी ला रही हैं सीएनजी कारें

सीएनजी गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता पर दूसरी कार कंपनियों की भी नजर है। फोर्ड-महिंद्रा के अलावा स्कोडा भी सीएनजी फिटेड गाड़ियां लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। स्कोडा-फॉक्सवैगन ग्रुप भारत में टर्बो-सीएनजी इंजन लाने की तैयारी कर रहा है, वहीं यूरोपियन देशों में वह इसकी बिक्री पहले से ही कर रहा है। हाल ही में स्कोडा रैपिड को एक सीएनजी पंप पर सीएनजी भरवाते हुए भी स्पॉट किया गया। जिसका स्कोडा ने भी खंडन नहीं किया। वहीं पोलो यूरोप में 13.8 किग्रा के सिलंडर के साथ बेची जाती है, जो 368 किमी का माइलेज देती है।

मारुति की सात सीएनजी कारें

मारुति सुजुकी इन दिनों अपने 14 मॉडल्स में से सात मॉडल्स सीएनजी के साथ पेश कर रही है। मारुति को उम्मीद है कि सीएनजी कारों की बिक्री इस वित्त वर्ष में 36 फीसदी यानी 144,000 यूनिट्स तक पहुंच सकती है। कंपनी की योजना सभी छोटी कारों को सीएनजी के साथ पेश करनी की है। वहीं कोरियाई कंपनी ह्यूंदै इस समय अपने 10 मॉडल्स में से 3 को सीएनजी के साथ पेश कर रही है। कंपनी का कहना है कि सेंट्रो, Nios और ऑरा के सीएनजी वैरियंट्स की बिक्री लगातार रफ्तार रही है। कंपनी ने 2019 में 11,416 यूनिट्स सीएनजी गाड़ियों की बिक्री की।

पेट्रोल से आधी है कीमत!

कंपनियों की योजना सीएनजी वैरियंट्स की 3,000 यूनिट्स हर महीने बेचने की है। लोग पहले के मुकाबले फैक्टरी फिटेड सीएनजी गाड़ियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसकी कई कारण हैं, इनमें बिना झंझट रजिस्ट्रेशन, हाई क्वॉलिटी किट्स, लीकप्रूफ डिजाइन के अलावा पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी की कम कीमतें हैं। आज के दौर में जहां देश के कई शहरों में पेट्रोल के कीमतें 87 रुपये प्रति लीटर को पार कर चुकी हैं, वहीं सीएनजी के दाम 43 रुपये प्रति किग्रा तक हैं।
पिछले पांच सालों में सीएनजी और पेट्रोल की कीमतें

पेट्रोल vs सीएनजी

वित्त वर्ष सीएनजी की कीमतें (प्रति किग्रा) पेट्रोल (प्रति लीटर)
2015-16 38 61.87
2016-17 38 68.26
2017-18 40.61 73.98
2018-19 45.7 72.86
2019-20 42 69.59
2020 42.70 (दिल्ली) 87.74 (मुंबई)

डुअल फ्यूल ऑप्शन

वहीं सरकार भी अगले 10 सालों में 10 हजार सीएनजी स्टेशन खोलने की योजना बना रही है, जो 2019 आखिर तक 190 शहरों में 1730 सीएनजी स्टेशंस थी। वहीं इस साल के आखिर तक 373 शहरों में 3400 सीएनजी डिस्ट्रीब्यूशन आउटलेट्स खोलने की भी योजना है। साथ ही, पॉकेट फ्रेंडली होने के साथ एक बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल के मुकाबले इनका इकोफ्रेंडली होना भी है। वहीं ये डुअल फ्यूल ऑप्शन के साथ आती हैं, अगर कहीं सीएनजी पंप की उपलब्धता न हो तो पेट्रोल भरवा कर भी गतंव्य तक पहुंचा जा सकता है।

डीजल के मुकाबले रनिंग कॉस्ट बेहद कम

अगर डीजल और सीएनजी की रनिंग कॉस्ट की तुलना करें, तो सीएनजी कार की रनिंग कॉस्ट 1.60 पैसे प्रति किमी आती है, जबकि एक डीजल कार की रनिंग कॉस्ट 3 से 5.4 किमी प्रति लीटर तक आती है। वहीं सीएनजी गाड़ी खरीदने के लिए 50 से 60 हजार रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ते हैं, जबकि डीजल गाड़ी के लिए 1.25 से 1.50 लाख रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं। इसके अलावा सीएनजी 27 देशों में बेची जाती है।
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महंगी हैं इलेक्ट्रिक कारें

सीएनजी कारों का जो विकल्प देखा जा रहा है, वह है इलेक्ट्रिक कारें। लेकिन भी इलेक्ट्रिक कारें सीएनजी फिटेड गाड़ियों के लिए ज्यादा बड़ी चुनौती भी नहीं हैं। इसकी वजह है कि फिलहाल देश में केवल पांच ही इलेक्ट्रिक कारें हैं, जिनकी कीमत 10 लाख रुपये से ज्यादा है। वहीं इनके मुकाबले सीएनजी व्हीकल्स ज्यादा सस्ते हैं। जैसे एंट्री लेवल सीएनजी कार मारुति ऑल्टो की कीमत 4.33 लाख रुपये तक है, जबकि एंट्री लेवल इलेक्ट्रिक कार जैसे टाटा टिगोर ईवी की कीमत 9.5 लाख रुपये से शुरू है।
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