पीठ ने एनजीटी द्वारा जुर्माना लगाने के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया। हालांकि पीठ ने कंपनी के निदेशकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से एनजीटी को रोक दिया। पीठ ने कहा कि सभी पक्षों के अधिकार खुले रहेंगे तथा फॉक्सवैगन समिति के आकलन को लेकर आपत्तियां एनजीटी के समक्ष रख सकती है।
शीर्ष न्यायालय ने एनजीटी को इस मामले में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय का पक्ष भी सुनने को कहा। फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एनजीटी के 100 करोड़ रुपये के जुर्माने के 17 जनवरी के फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है। एनजीटी ने 16 नवंबर 2018 को कहा कि फाक्सवैगन की डीजल कारों में प्रदूषण नियमों को चकमा देने वाले उपकरण के प्रयोग से यह माना जाएगा कि कंपनी ने पर्यावरण को क्षति पहुंचायी है।
उसने 100 करोड़ रुपये के जुर्माने को एक अंतरिम व्यवस्था बताया था और क्षति के बारे में एक संयुक्त टीम बनायी थी। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ,भारी उद्योग मंत्रालय, आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआई) तथा राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान को रखा गया। चार सदस्यीय इस समिति ने अपने आकलन के बाद कंपनी पर दिल्ली में स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के लिए 171.34 करोड़ रुपये के जुर्माने की सिफारिश की है।