सड़क दुर्घटना या अचानक मौत हो जानी की स्थिति में कार, बाइक, स्कूटर समेत अन्य वाहनों का स्वामित्व हस्तांतरित कराने में आश्रित परिवारों को इतनी तकलीफों का सामना करना पड़ता है, मानो मुश्किलों का पहाड़ ही टूट पड़ा हो। अब सरकार गाड़ी के मालिकाना हक के हस्तांतरण की कानूनी प्रक्रिया में बदलाव करने पर विचार कर रही है। इससे मृतक आश्रितों को एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) (अनापत्ति प्रमाणपत्र) हासिल करने से छुटकारा मिल जाएगा।
सरकार गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के वक्त ही वाहन मालिक के पत्नी और बच्चों को नॉमिनी घोषित करने का प्रावधान कर सकती है, ताकि मृतकों के परिजनों को बाद में स्वामित्व हस्तांतरित कराने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
अभी लंबी प्रक्रिया के तहत परिवार के सभी सदस्यों से एनओसी लेने के बाद ही वाहन स्वामित्व का हस्तांतरण हो पाता है। परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन मालिक की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार के सदस्यों को बार-बार आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) के चक्कर काटने पड़ते हैं। हर राज्य में वाहन स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़े नियम अलग हैं।
आरटीओ की ओर से फॉर्म भरवाया जाता है और परिवार के सभी सदस्यों से एनओसी लेने की आवश्यकता होती है। क्योंकि फॉर्म पर वाहन मालिक के हस्ताक्षर नहीं होते हैं। इसमें शहर के बाहर या विदेश में रहने वाले सदस्यों से एनओसी हासिल करना काफी मुश्किल भरा अनुभव होता है।
मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के अनुसार 90 दिनों के अंदर गाड़ी के मालिकाना हक का हस्तांतरण हो जाना चाहिए। इस समय अवधि के भीतर ऐसा नहीं होने पर हर महीने 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। वहीं ज्यादा समय बीत जाने पर जुर्माना राशि हजारों में पहुंच जाती है। ऐसी परिस्थिति में परिवार के सामने गाड़ी को कबाड़ में बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। इस पूरी प्रक्रिया में व्यवसायिक वाहनों के हस्तांतरण में ज्यादा दिक्कतें पेश आती हैं।
नॉमिनी तय करने की सिफारिश
रिपोर्ट के मुताबिक सड़क परिवहन मंत्रालय की केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमसीआर) के अध्यक्ष एवं बस-कार ऑपरेटर्स कॉन्फेडेरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गुरमीत सिंह तनेजा का कहना है कि सरकार से यह सिफारिश की गई है कि वह ऐसे नियम बनाए कि गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के दौरान ही वाहन मालिक नॉमिनी तय कर सकें। इस नियम से मृतक के आश्रितों को होने वाली परेशानी से मुक्ति मिले सकेगी। दूरी के कारण व्यावसायिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन और परमिट तक रद्द कर दिए जाते हैं। ऐसे में अराजक तत्व ऐसी वाहनों का फायदा उठाने से नहीं चूकते।
'नॉमिनी तय करने की प्रक्रिया बदलनी चाहिए'
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि नॉमिनी तय करने का प्रावधान ऑनलाइन भी शामिल कर देना चाहिए। जिससे करोड़ों वाहन मालिक नॉमिनी में अपनी पत्नी-बच्चों का नाम लिखा सकें। बैंक खाता, बीमा में नॉमिनी का प्रावधान है तो सरकार को वाहन पंजीकरण में जल्द यह प्रावधान करना चाहिए।