फाडा के आंकड़ों के मुताबिक पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री में 4.6 फीसदी और दो पहिया वाहनों की बिक्री में पांच फीसदी की गिरावट आई है। वहीं कमर्शियल वाहन और तिपहिया वाहनों की बिक्री में क्रमशः 19.3 फीसदी और 2.8 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि कंपनियों का तर्क है कि मानसून में देरी की वजह से ये गिरावट आई है।
फाडा का कहना है कि जून महीने की शुरुआत तो काफी सकारात्मक रही थी, लेकिन मानसून में देरी के चलते महीना खत्म होने तक बिक्री में गिरावट आती चली गई। हालांकि वाहन खरीदने को लेकर लोगों की पूछताछ में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वह बिक्री में नहीं बदल पाई और ग्राहकों ने खरीदारी को टाल दिया।
फाडा के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा वाहन रजिस्टर हुए, राज्य में 2,93,905 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। वहीं महाराष्ट्र और तमिलनाडु में यह संख्या 1,56,716 और 1,49,698 की रही। पैसेंजर व्हीकल्स के रजिस्ट्रेशन की बात करें, तो उत्तर प्रदेश में 30,358, कर्नाटक में यह संख्या 18,288 रही। वहीं दो-पहिया वाहन श्रेणी में उत्तर प्रदेश में 2,55,812, तमिलनाडु में 1,24,534, महाराष्ट्र में 1,18,453 टू-व्हीलर रजिस्टर हुए। जबकि कमर्शियल वाहन कैटेगरी में तमिलनाडु में 6,500, महाराष्ट्र में 6,172 और कर्नाटक में 4,633 वाहन रजिस्टर हुए।
फाडा का कहना है कि डीलरों के लिये राहत की बात यह है कि लगातार घटती बिक्री से कंपनियों ने डीलरों का बोझ कम किया, क्योंकि कंपनियों ने उत्पादन में कमी की है, जिससे डीलरों के थोक बिल में कमी आई है। माना जा रहा है कि यह ट्रेंड कुछ और हफ्तों तक बना रह सकता है, जिससे डीलर अगले चार हफ्तों में इन्वेंट्री को भी कम कर पाएंगे।