संसद में 2018-19 के लिए बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री अरुण जेटली से कारों पर लगने वाले जीएसटी को हटाने या कम करने को लेकर काफी उम्मीद की जा रही थी। हालांकि जेटली ने बगैर कोई घोषणा किए ऑटोमोबाइल कंपनियों के संचालकों को कोई राहत नहीं दी है। वहीं, सरकार ने कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया है, जो कार निर्माता कंपनियों के मालिकों का सिरदर्द बन सकती है।
गौरतलब है कि पिछले साल जीएसटी लगने की वजह से 'वन नेशन वन टैक्स' स्कीम के नाम पर वसूला जा रहा अप्रत्यक्ष कर ऑटोमोबाइल निर्माताओं की गले की फांस बन गया था। इसमें कार निर्माता कंपनियों को उम्मीद थी कि सरकार जीएसटी हटाकर उन्हें राहत देगी। इसके अलावा लग्जरी कारों पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी में भी कटौती होने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन इन मुद्दों से जुड़ी कोई घोषणा न होने की वजह से कार निर्माता कंपनियों के मालिक काफी मायूस हैं।
खास तौर पर भारत की ऑटोमेकर्स कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में छूट को लेकर काफी उम्मीदें थीं। वहीं, ऑटो जगत में रिसर्च और डेवलपमेंट के साथ-साथ फेम (फास्टर एडोप्शन एंड मैनुफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाईब्रिड व्हीकल) में वित्तीय सहायता न मिलने की वजह से कारोबारियो को बड़ा झटका लगा है।
इतना ही नहीं अरुण जेटली ने इस साल अपने
बजट में इलेक्ट्रिकल कारों को बढ़ावा देने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया है। इससे पहले सर्विस टैक्स घटाकर और ग्राहकों को टैक्स छूट का फायदा देकर इलेक्ट्रिकल कारों की बिक्री को बढ़ावा दिए जाने की उम्मीद की जा रही थी। बता दें कि इलेक्ट्रिकल कारों पर फिलहाल 12 फीसदी जीएसटी लगता है। कार निर्माताओं को उम्मीद थी कि सरकार इसे घटाकर 5 प्रतिशत करेगी।