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ट्रैक्टर कंपनियां भी गर्मियों में कर रही हैं ‘छुट्टी’ पर जाने की तैयारी, मंदी से हैं परेशान

Wed, 26 Jun 2019 02:30 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Mahindra Jivo Tractor - फोटो : AmarUjala
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ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले तीन महीने से मंदी छाई हुई है। पैसेंजर व्हीकल्स के साथ टू-व्हीलर सेगमेंट भी मंदी की मार से जूझ रहा है। यहां तक कि ट्रैक्टर की बिक्री में भी गिरावट आई है। पिछले तीन महीनों में ट्रैक्टर की बिक्री में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है, जिसके चलते कंपनियों ने ट्रैक्टर का उत्पादन घटा दिया है।

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5 से 13 दिनों तक कोई उत्पादन नहीं

वहीं देश की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी में शामिल महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एलान किया है कि वह 5 से 13 दिनों तक कोई उत्पादन नहीं करेगी और यह दूसरे ऑटोमोबाइल उपकरणों और फार्म उपकरण बनाने वाली प्लांट्स पर भी लागू होगा। वहीं एस्कॉर्ट्स ने भी अपना उत्पादन घटाने का फैसला किया है।
 

खरीफ की बुवाई के बाद भी ट्रैक्टर की मांग में कमी

हालांकि इस बार मानसून को लेकर अनिश्चितता छाई हुई है, वहीं खरीफ की बुवाई के बाद भी ट्रैक्टर की मांग में कमी देखी जा रही है। ट्रैक्टर उद्योग का कहना है कि महाराष्ट्र और तमिलनाडू में सूखे के हालात हैं, जिससे मांग 20 से 40 प्रतिशत की कमी आई है और इसका असर पूरे बाजार पर दिखाई दे रहा है।
 

जलाशयों में पानी का स्तर लगातार नीचे

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई वहीं जलाशयों में पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है और सूखे की स्थिति बन रही है। वहीं महाराष्ट्र में यह 30 से 50 प्रतिशत तक है, जबकि तमिलनाडू में 20 से 30 प्रतिशत तक है। हालांकि ट्रैक्टर उद्योग में इन दोनों राज्यों का बाजार मात्र 10 प्रतिशत ही है, वहीं मध्य प्रदेश में हालात थोड़े ठीक हैं और वहां मांग बरकरार है, जिससे गिरती बिक्री पर लगाम लगी है।
 

प्रोडक्शन 21 से 25 दिन

वहीं जहां तक डीलर के पास मौजूद स्टॉक की बात है, तो एस्कॉर्ट ने पिछले कुछ सालों में प्रोडक्शन को 21 से 25 दिन किया है। एस्कॉर्ट के एग्री मशीनरी और इमरजिंग बिजनेस के चीफ एक्जीक्यूटिव शेनू अग्रवाल का कहना है कि अप्रैल में नवरात्रों के चलते फऱवरी और मार्च में कुछ अतिरिक्त ट्रैक्टर डिपो में रखे थे, और वे भी स्टॉक में शामिल हैं। जिसका नतीजा यह हुआ है कि अप्रैल, मई और जून में हमारी उम्मीद से ज्यादा स्टॉक एकत्र हो गया है, जिसके चलते हमें उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है।
 

ट्रैक्टर्स का स्टॉक 5 हफ्तों या 35 दिन

फिलहाल ट्रैक्टर्स का स्टॉक 5 हफ्तों या 35 दिनों तक का है। सोनालिका ग्रुप के ईडी रमन मित्तल का कहना है कि मौजूदा मांग और ट्रेंड में मांग में कमी को देखते हुए हमने अपने स्टॉक को सीमित किया है, लेकिन जैसे ही मांग में मांग बढ़ेगी हम अपने संसाधनों और स्टॉक में बढ़ोतरी करेंगे।
 

2001-02 से हालात बेहतर

वहीं अग्रवाल का कहना है कि अभी हालात इतने भी बुरे नहीं हुए हैं, जो 2001-02 में थे और उत्पादन में सुधार पहले ही किया जा चुका है। इससे पहले ऑटो कंपनियों ने भी प्रोडक्शन बंद करने का एलान किया था। इसके पीछे मुख्य वजह कि उनके पास बिक्री से ज्यादा स्टॉक पड़ा हुआ है और डिमांड कम होने से इन्वेंट्री क्लीयर नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह से कार-टू व्हीलर कंपनियां कुछ दिनों के लिए प्रोडक्शन बंद करना चाहती हैं। ताकि डिमांड के मुताबिक प्रोडक्शन शुरू कर सकें।
 
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5 लाख से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल्स स्टॉक में

ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास लगभग 5 लाख से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल्स स्टॉक में हैं, जिनकी कीमत तकरीबन 35 हजार करोड़ रुपये है। जून से ही ये वाहन डीलरों के पास बिक्री के लिए खड़े हैं। वहीं इनमें टूव्हीलर्स की संख्या सबसे ज्यादा है। तकरीबन 30 लाख दोपहिया वाहन स्टॉक में हैं।
 
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