भारत सरकार ने 2030 तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट होने का लक्ष्य दिया है। हालांकि यह इतना आसान नहीं है जितना दिख रहा है पर एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अगर भारत इसका 30 फीसदी भी अचीव कर पाता है तो बहुत बड़ी बात होगी। लेकिन इस बीच उन कंपनियों ने भारत में अपनी संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं जो अब तक यहां से दूर थीं। टेस्ला भी भारतीय बाजार में अपना पैर जमाने की फिराक में दिख रही है। लेकिन शुरुआत में वह चाहती है कि भारत सरकार उसे आयात ड्यूटी से फौरी तौर पर राहत दे दे।
इस साल के शुरू में ही टेस्ला के सीईओ ने ट्वीट करके यह जानकारी दी थी कि वो 2017 की गर्मियों में अपना कारोबार भारत में शुरू करेंगे। लेकिन इसके बावजूद अब तक टेस्ला कोई भी इस तरह का सेटअप यहां पर नहीं बना सकी है जिससे तुरंत गाड़ियां बेचना शुरू किया जा सके। फिलहाल भारत के इलेक्ट्रिक परिवेश की बात करें तो यहां पर कोई भी ईकोसिस्टम ऐसा नहीं बना है जो इलेक्ट्रिक वाहनों को सपोर्ट करे। इसी बीच एक महत्वपूर्ण खबर ये आ रही है कि एलन मस्क की ख्वाहिश है कि जब तक उनका लोकल सेटअप न शुरू हो जाए भारत सरकार उनकी कारों से फिलहाल के लिए इंपोर्ट ड्यूटी से मुक्त कर दे। साथ ही ये भी संकेत आ रहे हैं कि कंपनी यहां पर टेस्ला गीगाफैक्ट्री बना सकती है।
टेस्ला की आने की खबर काफी दिनों से सुर्खियों में है और पिछले दिनों ट्विटर के माध्यम से महिंद्रा एंड महिंद्रा प्रमुख आनंद महिंद्रा ने टेस्ला के प्रमुख मस्क को भारत में आकर इलेक्ट्रिक कार बनाने का न्यौता दिया था। भारत तेजी के साथ देश में बैट्री निर्माण की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दे रहा है क्योंकि एक इलेक्ट्रिक वाहन में बैट्री सबसे महत्वपूर्ण होती है और फिलहाल भारत में इसे आयात के जरिए मंगाया जाता है जिसके कारण इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें बढ़ जाती हैं।