देश की प्रमुख ऑटो निर्माता Tata Motors (टाटा मोटर्स) को कुछ राहत देते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इलेक्ट्रिक कार Tata Nexon EV (टाटा नेक्सन ईवी) पर दी गई सब्सिडी को निलंबित कर दिया गया था। दिल्ली सरकार ने टाटा नेक्सन ईवी को सब्सिडी सूची से हटाने का फैसला उन आरोपों के बाद लिया, जिसमें कहा गया था कि इस इलेक्ट्रिक कार की एआरएआई द्वारा प्रमाणित रेंज और वास्तविक-ड्राइविंग रेंज में अंतर है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा कि टाटा मोटर्स ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) द्वारा प्रमाणित प्रति चार्ज 300 किलोमीटर के आंकड़े के आधार पर नेक्सन ईवी की ड्राइविंग रेंज का दावा किया था। यह नोट किया गया कि कार निर्माता ने इसके आधार पर सब्सिडी के लिए आवेदन किया था।
टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने कहा, "माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने हमारे रिट पर नोटिस जारी किया है और दिल्ली सरकार के वाहनों की पात्रता सूची से नेक्सन ईवी को हटाने के खिलाफ रोक लगाकर अंतरिम राहत दी है।" उन्होंने कहा, "माननीय उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है।"
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार को हाल ही में शिकायत मिली थी कि Nexon EV की प्रमाणित रेंज और वास्तविक-ड्राइविंग रेंज में अंतर है। नजफगढ़ के रहनेवाले एक व्यक्ति ने कहा था कि एक अधिकृत कंपनी डीलर द्वारा सलाह दी गई ड्राइविंग के सभी तौर-तरीकों का पालन करने के बावजूद, वह कार निर्माता द्वारा कहे गए प्रति-चार्ज रेंज को हासिल करने में सफल नहीं हो पाया। जिसके बाद, दिल्ली सरकार ने ईवी पर दी जाने वाली सब्सिडी को निलंबित कर दिया था।
एक इलेक्ट्रिक कार को खरीदने के लिए मिलने वाले फायदों की वजह से दिल्ली इस समय सबसे आदर्श शहर है। यहां की सरकार राजधानी में खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी, और रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट देती है। ऐसे में नेक्सन ईवी को दिल्ली सरकार की सब्सिडी सूची से हटाया जाना टाटा मोटर्स के लिए एक झटका था। जिसमें कंपनी ने दावा किया कि वास्तविक दुनिया में ईवी की ड्राइविंग रेंज को प्रभावित करने के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं।
यह बात विशेष रूप से सिर्फ Nexon EV पर लागू नहीं होती है। इलेक्ट्रिक वाहनों की प्रमाणित सीमा वास्तविक दुनिया की स्थितियों में एयर कंडीशनिंग, इलाके, सड़क की स्थिति, केबिन लोड जैसे कारकों की वजह से अलग-अलग हो सकती है। और ये सभी मिल कर आखिर में कार की प्रति चार्जिंग पर मिलने वाले ड्राइविंग रेंज को हासिल करने में अहम भूमिका निभाते हैं।