केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर बैन के आदेश पर रोक लगाने की अपील की है। केंद्र सरकार ने गुहार लगाई है कि डीजल से चलने वाले रक्षा वाहनों, स्कूल बसों, ट्रैक्टरों और निजी वाहनों को इस प्रतिबंध से मुक्त किया जाना चाहिए।
रोजी-रोटी पर पड़ रहा है असर
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अपनी याचिका में केंद्र ने एनजीटी के ऑर्डर पर स्टे लगाने की मांग की है और कहा है कि इस प्रतिबंध से समाज का कमजोर वर्ग आर्थिक दृष्टि से प्रभावित हो रहा है, जिनकी रोजी-रोटी इन वाहनों पर टिकी हुई है। साथ ही केंद्र ने याचिका में वजह भी बताई है कि क्यों इस खास श्रेणी के वाहनों को प्रतिबंध से बाहर रखा जाए।
15 सालों का एडवांस रोड टैक्स एकमुश्त जमा
इससे पहले सरकार ने एनजीटी के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा था कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र के जरिए ही यह तय किया जा सकता है कि वाहन सड़क पर चलने योग्य है या नहीं, इसके अलावा कोई और मानदंड तय नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने भी कहा था कि वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराते समय वाहन मालिक पहले ही 15 सालों के लिए एडवांस रोड टैक्स जमा का देते हैं। लेकिन एनजीटी के आदेश के चलते कई वाहनों को सड़क से हटने के लिए मजूबर होना पड़ा है।
केंद्र सरकार के पास है शक्ति
केंद्र ने अपनी याचिका में यह भी बताया है कि वाहन की उम्र तय करने की अधिकार केंद्र सरकार के पास है और मोटर वाहन अधिनियम में रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का प्रावधान रखा गया है। गौरतलब है कि एनजीटी ने ऐसे कई आदेश दिए हैं, जिनमें दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले भी दायर की थी याचिका
इसे पहले जनवरी 2017 में भी केंद्र सरकार ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दस साल पुराने डीजल वाहनों पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिये उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि इस प्रतिबंध से समाज का कमजोर वर्ग आर्थिक दृष्टि से प्रभावित हो रहा है।