कोई और चारा न होते हुए टाटा माटर्स को बेचने का प्रस्ताव लेकर रतन टाटा अमेरिका में फोर्ड मोटर के हेड ऑफिस पहुंच गए। उनके साथ उनकी कंपनी के कुछ शेयरहोल्डर्स भी पहुंचे। फोर्ड कंपनी के साथ रतन टाटा की तीन घंटे तक मीटिंग चली। जिसमें फोर्ड के चेयरमैन ने रतन टाटा से बदसलूकी की और कहा "जब तुम्हे इस बिजनेस की कोई जानकारी नहीं थी तो, तुमने इस कार को लांच करने में इतना पैसा क्यों लगा दिया? खैर, हम तुम्हारी इस कंपनी को खरीदकर तुम पर अहसान कर रहे है.”।
रतन टाटा इस बात से परेशान हो गए, और मीटिंग को छोड़कर भारत लौट आए। इस मीटिंग के बाद उन्होंने टाटा मोटर्स को नहीं बेचने का फैसला किया। और उन्होंने एक बार फिर से इस कंपनी में मेहतन करन की ठानी, और इस बार कंपनी ने खूब तरक्की की । हालात यह रहे कि टाटा मोटर्स को लगातार मुनाफा होने लगा।
वहीं फोर्ड घाटे के कारण दिवालिया होने की कगार पर आ गई। इसके बाद रतन टाटा ने फोर्ड की लेंड रोवर और जगुआर खरीदने का प्रस्ताव रखा, जिनके कारण ही फोर्ड घाटे में गई थी। और आज टाटा की कहानी किसी से छुपी नहीं है गाड़ियां हो या हवाई जहाज टाटा ने सबमें बाती मारी है। कहते है न बुरा समय मेहनत के आगे दम तोड़ देता है।