सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा कि यदि मंदी का दौर आगे भी जारी रहा, तो इसका असर देश की जीडीपी पर भी पड़ेगा। ऐसे में ऑटो उद्योग को वापस पटरी पर लाने और बिक्री में आ रही गिरावट को रोकने के लिए राहत पैकेज की बहुत जरूरत है। स्थिति में सुधार के लिए उद्योग ने जीएसटी दरों को भी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी पर करने की मांग की है। वहीं बिक्री को बढ़ाने के लिए ऑटो सेक्टर भी कई दूसरे उपायों पर भी काम कर रहा है।
सियाम के मुताबिक नौ महीनों से लगातार घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल रही है। इस साल जुलाई महीने में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री 30.9 फीसदी गिरी है और यही वजह से कि बड़े पैमाने पर लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।
इस साल जुलाई महीने में दोपहिया वाहनों की बिक्री 16.82 फीसदी गिरकर 15,11,692 यूनिट्स रह गई। जबकि बीते साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 18,17,406 यूनिट्स का रहा था। इसके अलावा जुलाई में ही 20,0790 पैसेंजर कारों की बिक्री हुई। जबकि बीते साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 29,0930 यूनिट्स का था। इतना ही नहीं इस साल जुलाई महीने में हेवी, मीडियम और लाइट कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री भी 25.71 फीसदी कम हुई।
सियाम के मुताबिक ऑटो सेक्टर पर छाई इस मंदी की वजह से 300 डीलरों को अपना धंधा बंद करना पड़ा और इसकी वजह से लाखों लोगों की नौकरी चली गई। पिछले दो महीनो में 15,000 लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। हालांकि इनमें अधिकांश नौकरियां अस्थाई और कैजुअल स्तर की हैं। इतना ही नहीं कंपोनेंट उद्योग में भी लाखों लोगों की नौकरियां संकट में हैं।