दिल्ली की सड़कों पर निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के दबाव के मद्देनजर एक संसदीय समिति ने बुधवार को सुझाव दिया कि नए वाहनों का पंजीकरण उसी सूरत में किया जाए जब वाहन मालिक "पुराने" वाहन को बेच दें और यह साबित करें कि नए वाहन के लिए उनके पास पार्किंग की जगह है। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि वाहन के इंश्योरेंस प्रीमियम को ड्राइवर के यातायात उल्लंघन रिकॉर्ड के साथ जोड़ दिया जाए। जिससे सड़क पर कानून तोड़ने के हर जुर्म के लिए उनसे ज्यादा प्रीमियम वसूला जा सके।
विभाग से संबंधित राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा के नेतृत्व में 31 सदस्यों की गृह मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट का शीर्षक है- "दिल्ली में बदतर होती यातायात व्यवस्था का प्रबंधन।" रिपोर्ट में शहर के सड़कों को मुसाफिरों के लिए बेहतर बनाने के लिए 107 सुझाव दिए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की सड़कों में वाहनों की बढ़ती संख्या को काबू करने के लिए कुछ "क्रांतिकारी उपायों" की जरूरत है। रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों का मुख्य लक्ष्य शहर में निजी वाहनों की संख्या को बढ़ने से रोकना है।
समिति ने दिल्ली की सड़कों पर चल रहे "पुराने" और प्रदूषणकारी वाहनों पर भी चिंता जताई है। पुराने वाहनों का मतलब है डीजल की 10 साल पुरानी और पेट्रोल की 15 साल पुरानी या इससे अधिक पुरानी गाड़ियां। समिति ने 10 साल पुराने पेट्रोल और 15 साल पुराने डीजल वाहनों को सड़कों से हटाने संबंधी राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेशों को लागू करने के लिए कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है।
समिति ने आपातकालीन वाहनों, दो पहिया वाहनों और वीआईपी गाड़ियों के लिए अगल लेन बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। हालांकि विशेषज्ञों ने इन सुझावों की तारीफ की है लेकिन इनके लागू किए जाने को लेकर संशय भी जताया है।