देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India (मारुति सुजुकी इंडिया) ने बुधवार को कहा कि उसने नए उत्सर्जन नियमों के लागू होने से पहले ही पांच लाख BS6 वाहनों की बिक्री की है। बता दें कि एक अप्रैल 2020 से BS6 ईंधन उत्सर्जन नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया है। Maruti Suzuki ने बयान में कहा कि कंपनी अभी BS6 पेट्रोल इंजन वाले 10 मॉडल पेशकश कर रही है।
Maruti Suzuki S-Presso
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कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी केनिची अयुकावा ने कहा, "यह उपलब्धि भारत में नई इंजन और तकनीकों की वृद्धि की क्षमता को दर्शाती है।" उन्होंने कहा, "हमने अपने लोकप्रिय मॉडलों में BS6 अनुरूप इंजन को पहले ही पेश कर दिया। यह सरकार के स्वच्छ और हरित पर्यावरण के विचार को लेकर हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
गौरतलब है कि अप्रैल 2020 के बाद बिना बीएस6 इंजन वाली कोई भी कार रजिस्टर्ड नहीं होगी। कंपनी का दावा है कि पिछले 10 महीनों में कारों की कुल बिक्री में 47 फीसदी कारें बीएस6 इंजन वाली थीं। इन कारों में आने वाला बीएस6 इंजन पुराने इंजन के मुकाबले 25 फीसदी कम नाइट्रस ऑक्साइड छोड़ता है। वहीं कंपनी की योजना है कि अगले महीने फरवरी से शुरू होने वाले ऑटो एक्सपो में अपनी सभी कारों को बीएस6 इंजन के साथ पेश कर दे।
Maruti Suzuki XL6
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मारुति ने फिलहाल केवल पेट्रोल इंजन वाली कारों को ही बीएस6 इंजन के साथ उतारा है। मारुति ने अपनी पहली बीएस-6 इंजन वाली कार अप्रैल, 2019 में पेश की थी। कंपनी वर्तमान में बीएस-6 अनुकूल पेट्रोल इंजन वाले 10 मॉडल पेश कर चुकी है। इन मॉडल्स में ऑल्टो, ईको, एस-प्रेसो, सिलेरियो, वैगन आर, स्विफ्ट, बलेनो, डिजायर, अर्टिगा और XL6 शामिल हैं।
Maruti Suzuki XL5
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बीएस नॉर्म्स क्या होते हैं?
बीएस यानी 'भारत स्टेज' जिसे साल 2000 में पेश किया गया था। जिससे पता चलता है कि गाड़ी कितना प्रदूषण फैलाती है। बीएस के जरिए सरकार गाड़ियों के धुएं से होने वाले प्रदूषण को कंट्रोल करती है। समय-समय पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नए मानक जारी करता रहता है। बीएस के साथ जो नंबर होता है, उससे यह जानकारी मिलती है कि इंजन कितना प्रदूषण फैलाता है। जैसे बीएस-3 से कम प्रदूषण बीएस-4 से होगा और बीएस-6 काफी कम प्रदूषण करेगा, यानी जितना बड़ा नंबर उतना कम प्रदूषण।
Maruti Suzuki Car production
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BS6 के फायदे
पेट्रोल वाहनों की तुलना में डीजल वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। ऐसे में बीएस-6 लागू होने के बाद पेट्रोल और डीजल कारों के बीच ज्यादा अंतर नहीं रह जाएगा और इससे पेट्रोल कारों से 25 फीसदी और डीजल वाहनों से 68 फीसदी नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो जाएगा। सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार बीएस-6 ईधन से सल्फर की मात्रा बीएस-4 से पांच गुना तक कम होगी। वहीं बीएस-6 वाहनों में एडवांस्ड एमीशन कंट्रोल सिस्टम फिट होगा।