कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन ने पिछले हफ्ते एक बैठक में डीलरों से अपने ऋण चुकाने की शुरुआत करने और अवधि खत्म होने तक का इंतजार नहीं करने का आग्रह किया है। कंपनी को उम्मीद है कि इस कदम से डीलर्स की साख में बढ़ोतरी होगी और बैंक लोन देने की शर्तो में ढील देंगे। कंपनी सूत्रों का कहना है कि वह डीलर्स की वित्तीय हालात सुधारने के लिए व्यावसायिक जरूरतों और कॉस्ट स्ट्रक्चर की स्टडी कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का कहना है कि हमारी कोशिश सूचना प्रणाली को लागू करना और प्रक्रियाओं को मजबूत करना है, जो हमारे डीलरों और हमारे वित्त भागीदारों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगी। वहीं कंपनी भी लंबे समय तक सभी डीलरों के वित्तीय प्रदर्शन की निगरानी करने की योजना बना रही है। कोविड-19 के चलते बैंकों ने ऑटो डीलर्स को लोन देने पर सख्ती बरती हुई है। वहीं ऑटो सेक्टर पहले तो बीएस6 मानकों और फिर महामारी के चलते काफी दबाव में है।
वहीं लॉकडाउन के चलते कम बिक्री से होने से डीलरों की आर्थिक हालात खराब हो गई है। वहीं बैंकों ने भी डीलर्स को लोन देने की शर्तें भी कड़ी कर दीं, साथ ही कई डीलर्स को अल्प अवधि लोन देने से भी वंचित कर दिया। जिसके चलते डीलर्स वाहन निर्माता कंपनियों से गाड़ियां नहीं उठा पाए। मारुति के भी 2500 से ज्यादा डीलर्स भी बैंकों की सख्ती के कारण इसकी चपेट में आ गए। जिसके चलते 300 से ज्यादा डीलर्स ने अपना कामकाज समेत दिया, वहीं कुछ कोरोना के चलते आर्थिक परेशानियों में घिर गए हैं और कारोबार बंद करने की तैयारी कर रहे हैं। कंपनी अपने कुछ प्रोडक्ट्स पर मार्जिन बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिनकी बिक्री काफी कम है। इसके लिए डीलर्स को कंपनी प्रोत्साहित करेगी। ऑटोमोबाइल डीलर्स की काफी पुरानी मांग है कि उनके डीलर मार्जिन में बढ़ोतरी की जाए।