अगर आप नई कार खरीदते समय पुरानी कार एक्सचेंज करते हैं इसमें आपको ज्यादा फायदा नहीं होने वाला क्योंकि शो-रूम वाले आपकी पुरानी कार की सही वैल्यू नहीं लगाते, आपको यह कहा जाता है कि “ इस मॉडल की कोई वैल्यू नहीं है, ये मॉडल अच्छा नहीं है, इससे ज्यादा आपको दाम नहीं मिलेंगे” और न जाने ऐसे ही कितनि कमियां बता कर वो आपसे आपकी कार कम दाम में एक्सचेंज करवा लेता है और आप आसानी से उसकी बातों में फंसते चले जाते हैं। आपसे आपकी कार कम कीमत में लेकर वो उसी कार को किसी और को अच्छे दाम में निकाल देता है। इसलिए कभी भी कार को डीलर से एक्सचेंज ना करें, हमेशा ओपन मार्केट में ही बेचें। यहां आपको ज्यादा कीमत मिलेगी।
हर कार सेल्समैन और डीलर के पास कार बिक्री का टारगेट होता है जो महीना पूरा होने तक पूरा करना होता है। इसलिए कार खरीदेन महीने के आखिरी दिनों में जाएं। खुलकर मोल-भाव करें। बिलकुल न हिचकिचाएं और जितना हो सके पैसे कम करा लें।
कार खरीदते समय कभी भी किसी मॉडल को लेकर ज्यादा उतावला पन ना दिखाएं। ऐसे देखकर सेल्समैन आपसे ज्यादा पैसे वसूल करने की कोशिश करेगा। आपको बता दें कि सेल्समैन को फाइनेंस और इंश्योरेंस में भी कमीशन मिलता है। इसमें भी ज्यादा से ज्यादा मोलभाव करें।
कार लेते समय सेल्समैन आपको एक्सेसरिज के बारे में बताना शुरू करेगा। सेल्समैन आपको इंटीरियर कारपेट, सीट कवर्स, स्टीरियो सिस्टम, पार्किंग सेंसर और ना जाने कितने ही चीजें लगवाने को बोलेगा, और इनकी कीमत भी काफी ज्यादा बताएगा, लेकिन यदि सब आप ओपन मार्किट में (लाजपत नगर, करोल बाग, साकेत) जैसी जगहों पर कम दाम में लगवा सकते हैं और वो भी असली एक्सेसरिज। लेकिन बिना बिल के कोई भी एक्सेसरिज न खरीदें इससे आपको असली सामान मिलेगा। इतना ही अगर कोई सेल्समैन आपको बोलता है कि इस कार के साथ आपको 15000 रुपये की एक्सेसरिज फ्री दी जा रही है तो एक्सेसरिज की जगह उतनी ही कीमत का डिस्काउंट मांग लीजिये और वही एक्सेसरिज बाहर से लगवा लें, आपको सस्ती पड़ेगी और कई ऑप्शन भी आपको मिल जायेंगे।
कार कंपनियां केवल उन्हीं मॉडल्स पर डिस्काउंट और ऑफर्स देती हैं जिनकी बिक्री कम होती है। ताकि स्टॉक क्लियर हो सके।और जिन कारों पर वेटिंग में चल रही हैं या जो एक दम नया मॉडल हो उस पर कभी डिस्काउंट नहीं मिलता। ऐसे में अच्छी डील के लिए आप शोरूम में उपलब्ध मॉडल को ही सिलेक्ट करते हैं तो आप ज्यादा से ज्यादा पैसे बचा पाएंगे।