दरअसल सौरभ शर्मा नाम के एक वकील ने हाईकोर्ट में अपनी एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि 9 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने गाड़ी में मास्क नहीं पहनने के कारण उनका 500 रुपये का चालान किया। खास बात यह है कि उस समय सौरभ गाड़ी में अकेले थे।
सौरभ शर्मा के वकील जेपी वर्गीस ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली आपदा-प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से 4 अप्रैल को जारी आदेश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति कार में अकेला हो तो उसे मास्क लगाना जरूरी नहीं है।
मंत्रालय की तरफ से वकील फरमान अली माग्रे ने इस मामले की पूरी जानकारी के लिए कोर्ट से दो हफ्तों का समय मांगा।
कोर्ट ने सरकारी वकील को 7 जनवरी तक का समय देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में उन्हें इससे ज्यादा वक्त नहीं दिया जाएगा।
याचिकाकर्ता शर्मा ने कहा कि चालान जारी करने वाले अधिकारी निजी कार में अकेले यात्रा के दौरान भी मास्क लगाने की अनिवार्यता के संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं दिखा सके। उन्होंने चालान पर इस संबंध में लिखने के अनुरोध पर भी गौर नहीं किया, इसलिए याचिकाकर्ता ने विरोध के साथ ‘अवैध’ जुर्माना अदा किया।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि किसी कानून या अधिसूचना के बगैर निजी वाहन में अकेले ड्राइविंग के वक्त मास्क पहनने को अनिवार्य करते हुए जुर्माना भी कर दिया गया। यह अवैध और मनमाना है। याचिकाकर्ता ने चालान को खारिज करने, जुर्माने में वसूली गई 500 रुपये की राशि वापस कराने और मानसिक उत्पीड़न के बदले 10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।