भारत में कार, एसयूवी जैसे पैसेंजर व्हीकल्स का बाजार 2023 तक 50 लाख गाड़ियों तक पहुंच जाएगा। हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष 2018-19 में तकरीबन 33 लाख गाड़ियां बिकीं। हालांकि अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत में अभी भी गाड़ियां कम हैं। वहीं पैसेंजर गाड़ियों में सबसे ज्यादा रफ्तार एसयूवी गाड़ियों की रही है, जो सेडान से कहीं आगे है।
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कंसल्टेंसी फर्म रोलैंड बर्गर के साथ मिलकर 'मूविंग टुवर्ड्स ग्रीनर ट्रांसपोर्टेशन' नामक शीर्षक से किए गए अध्ययन में कहा है कि देश में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री हर साल औसतन 7.7% बढ़ेगी। बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पैसेंजर व्हीकल्स की सालाना बिक्री 2023 तक 50 लाख तक पहुंच जाएगी।
रिपोर्ट में सामने आया है कि पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट में सबसे ज्यादा ग्रोथ एसयूवी गाड़ियों की रही है और इस सेगमेंट में 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी तक की उम्मीद है, जबकि 2017-18 में एसयूवी सेगमेंट में 7.89 प्रतिशत तक की ग्रोथ रही। वहीं साल 2017-18 में 32.8 लाख यात्री वाहन बिके थे। रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत में कम गाड़ियां है, जिसके चलते ग्रोथ की काफी गुंजाइश है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में कॉमर्शियल गाड़ियों की बिक्री 8.32 लाख यूनिट की थी। साथ ही, संभावना जताई गई है कि 2023 तक 5.6% सालाना औसत ग्रोथ रफ्तार से 10 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि कॉमर्शियल सेक्टर में इतनी ग्रोथ नहीं रही जितनी की उम्मीद जताई जा रही थी। इसकी वजह है कि अप्रैल 2020 से क्षमता से अधिक माल लादने पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं पुराने वाहनों को हटाने की नीति भी बनाई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जीएसटी के कार्यान्वयन से विनिर्माण कार्यों में तेजी आएगी और वितरण प्रणाली भी तेज होगी।
सियाम की तरफ से जारी आकड़ों के मुताबिक 2017-18 में कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री 20% बढ़ी थी। जबकि 2017-18 में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 14.8% बढ़ी। वहीं बीते 5 वर्षों के दौरान इनकी बिक्री में सालाना औसतन 7.9% वृद्धि हुई।
कितनी रही गाड़ियों की बिक्री
| साल |
यात्री वाहन |
कॉमर्शियल |
| 2013-14 |
6.06% |
20.22% |
| 2014-15 |
3.90% |
2.83% |
| 2015-16 |
7.23% |
11.51% |
| 2016-17 |
9.26% |
4.14% |
| 2017-18 |
7.89% |
19.94% |
| (ग्रोथ के आंकड़े सियाम के अनुसार) |