भारत और चीन ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए तेजी बढ़ते हुए दो बड़े बाजार हैं। यहां कई तरह की कारें उपलब्ध हैं, सिर्फ यही नहीं अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स ने भी अब इन बाजारों की ओर अपना रुख कर लिया है। हालांकि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और मंदी ने इस उद्योग को थोड़ा परेशानी में जरूर डाला है। ऐसे में इन बाजारों में हाइब्रिड कारों का चलन भी बढ़ा है। वहीं भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने अपने एक अध्ययन में यह नतीजा निकाला है कि भारत और चीन में हाइब्रिड कारें अमेरिका के मुकाबले ईंधन की खपत कम करती हैं।
कुछ समय पहले किए गए इस अध्ययन में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेटरी (बर्कले लैब) के वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत और चीन की सड़कों पर ज्यादा वाहनों और कम जगह के कारण अमूमन जाम जैसी स्थिति हाती है। इसके अलावा इन देशों में वाहन चलाने का तरीका भी खासा आक्रामक होता है, फर्राटा भरने के मौके बहुत कम होते हैं। हाइब्रिड कारों के माध्यम से ईंधन बचाने के लिहाज से ये आदर्श परिस्थितियां हैं।'
बता दें कि लैब के वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के देशों में वाकई किस तरीके से वाहन चलाए जाते हैं और वहां के हालात कैसे होते हैं, इस आधार पर दो तरह के अध्ययन किए थे। इनसे ही नतीजा निकाला गया कि भारत और चीन में हाइब्रिड कारें अमेरिका की तुलना में ईंधन की खपत बहुत कम है।
अध्ययन करने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक आनंद गोपाल ने इस बारे में कहा कि भारत और चीन में परिवहन साधनों की वजह से अन्य माध्यमों के मुकाबले फिलहाल ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बहुत कम होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन देशों में वाहन मालिकों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए हमने इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन निश्चित तौर पर कार्बन उत्सर्जन कम कर सकते हैं।