सरकार की तरफ से यह कड़ा संदेश उस वक्त आया है जब वाहन निर्माता कंपनियां सरकार को दो हफ्ते के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों की रूपरेखा तैयार का मसौदा पेश करने में विफल हो गईं। पिछले महीने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में नीति आयोग ने दो हफ्ते बाद ठोस योजना के साथ फिर से आने के लिये कहा था, लेकिन वाहन निर्माताओं का कहना था कि उन्हें इस पर काम करने के लिये कम से कम चार महीने का वक्त चाहिये।
सरकार का कहना था कि वे इंटरनल कंबशन इंजनवाले दोपहिया और तिपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में कनवर्ट करने की योजना पेश करें। असल में सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग, सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय समेत बाकी एजेंसियों ने सहमति जताई थी कि 2025 तक 150 सीसी तक इंटरनल कंबशन इंजन वाले दो पहिया वाहन और 2023 तक तिपहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाए। गौतरलब है कि भारत में बिकने वाले 80 फीसदी वाहन दो पहिया या तिपहिया होते हैं।
वहीं अगर कंपनियां इस तय डेडलाइन को पूरा करने में विफल रहती हैं, तो सरकार उन पर वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण के लिए जुर्माना लगाने की बात कर रही है। सरकार का कहना है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कीमत वाहन निर्माता कंपनियों को भी भुगतनी पड़ेगी। वहीं सरकार इस फैसले से पीछे हटने के लिये तैयार नहीं है। सरकार को मनाने के लिए ऑटो कंपनियां राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाने के लिए लॉबिंग करने में जुट गई हैं।
पिछले महीने नीति आयोग के साथ बैठक में हीरो मोटर कॉर्प, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज, टीवीएस के चेयरमैन वेनू श्रीनिवासन और सियाम के डीजी विष्णु माथुर भी थे। आयोग ने इन सभी से दो हफ्ते के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों की रूपरेखा तैयार करने के लिए किसी बाहरी एजेंसी से अध्ययन कराने को कहा था। जिसका अभी तक जवाब नहीं मिला है। लेकिन तिपहिया बनाने वाली महिंद्रा एंड मंहिद्रा को छोड़ कर दोनों प्रमुख कंपनियों बजाज और टीवीएस अभी तक चुप्पी साधे हैं। बजाज और टीवीएस दोनों ही इसके लिये तैयार नहीं हैं और विरोध कर रहे हैं।
वहीं गुरुवार को आई न्यूज रिपोर्ट्स में बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज का कहना है कि सरकार नीति आयोग के साथ मिल कर टू-वीलर और थ्री-व्हीलर पर जबरन पाबंदी वाले रुख की समीक्षा कर रही है। न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक राजीव बजाज ने विभिन्न मंत्रालयों और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है, जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार टू-वीलर और थ्री-व्हीलर पर बैन नहीं लगाने जा रही है। वे चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने का रास्ता तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतिबंध की प्रस्ताव से ऑटो इंडस्ट्री बेहद परेशान थी, क्योंकि उन्होंने हाल ही में बीएस6 उत्सर्जन मानकों पर भारी निवेश किया है, जिसके चलते डेडलाइन की समय सीमा काफी कम थी।