जानकारी के लिए बता दें कि ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने लोकसभा में इस बात को स्वीकारा है कि इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री धीमी रफ्तार से है। और इस स्कीम के अनुसार अब तक कुल 652 इलेक्ट्रिक कारों की ही आपूर्ति हुई है। आपको बता दे कि Energy Efficiency Services Limited (EESL), को अलग-अलग सरकारी विभागों और दफ्तरों को कुल 10,000 इलेक्ट्रिक कारों की आपूर्ति करनी थी। लेकिन इनमे से सिर्फ 652 इलेक्ट्रिक कारों की ही आपूर्ति हुई है। यानि ये आंकड़े खुद बोल रहे हैं कि ये मामला कितना ठंडा पड़ा है।
जिस तरह से इलेक्ट्रिक की बिक्री में रफ्तार धीमी है उसे देखते हुए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक कारों की डिलिवरी की डेडलाइन को बढ़ाकर अब 31 जनवरी 2020 कर दिया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद मार्किट में उपलब्ध इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड इतनी सुस्त क्यों है?
देश में लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदना तो चाहते हैं लेकिन इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का होना, गाड़ियों में दमदार बैटरी का ना होना, और इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें काफी ज्यादा होना जैसे कारण हैं।
13 अक्टूबर को 400 इलेक्ट्रिक कारों की आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी किया था, जिसे 30 नवंबर 2017 तक आपूर्ति किया जाना था। जबकि 9600 इलेक्ट्रिक कारों के लिए 28 फरवरी 2018 को लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी हुआ था जिसे 31 जनवरी 2019 तक आपूर्ति किया जाना था। लेकिन अब इसे 31 जनवरी 2020 तक बढ़ा दिया गया है। इन कारों की आपूर्ति EESL द्वारा की जानी हैं। आपको बता दें कि 652 इलेक्ट्रिक कारों के लिए देश भर में 295 एसी और 161 डीसी कैप्टिव चार्जर लगाए गए हैं।