भारतीय सड़कों पर हर साल औसतन 10 फीसदी की दर से वाहन बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि 2050 तक देश की सड़कों पर 61 करोड़ वाहन होंगे जो दुनिया में सर्वाधिक होंगे। अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बीच दुनिया भर की
ऑटोमोबाइल कंपनियों की नजरें भारतीय बाजार पर हैं। ग्रेटर नोएडा में आयोजित हो रहा
ऑटो एक्सपो इसका सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बनकर सामने आ रहा है। वाहन कंपनियां इस बार अपने पुराने मॉडलों को नए रूप में प्रदर्शित करने के साथ मिशन-2030 की झलक भी पेश कर रही हैं। पेश है रिपोर्ट
2030 की तैयारी अभी से शुरू
देश की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने के संकेत के बाद वाहन निर्माता कंपनियों ने इसकी तैयारी पहले ही शुरू कर दी है। कुछ चुनिंदा शहरों में पेट्रोल और डीजल वाहनों को चरणबद्घ तरीके से बंद किया जा सकता है। इससे पहले कंपनियों ने इनोवेशन और नई तकनीकी पर जोर देते हुए नए मॉडल्स को ऑटो एक्सपो में शोकेस किया है। मारुति ने ई-सर्वाइवर को शोकेस कर 2020 में अपना पहला इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उतारने की तैयारी की तो फ्रांस की रेनो ने इलेक्ट्रिक कांसेप्ट कार ट्रेजर और ई-स्पोर्ट को पेश किया। महिंद्रा ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पोड यूडीओ लिथियम बैटरी वाला थ्री-व्हीहलर और जीरो एमिनेशन इलेक्ट्रिक बस ई-कोस्मो को शोकेस किया है।
पुराने मॉडल्स का नया अवतार
जानीमानी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भारतीय बाजार के अनुभव को पहचानते हुए अपने पुराने ब्रांड मॉडल्स को नए अवतार में पेश करने से परहेज नहीं किया। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति ने मोस्ट अवेटेड स्विफ्ट को नए रूप में पेश किया। ह्ड्ढयुंदई ने अपनी पॉपुलर आई-20 कार का एलिट फेसलिफ्ट वर्जन पेश किया। इसी तरह होंडा ने नई अमेज सीआरवी और सिविक का फेसलिफ्ट वर्जन पेश कर बाजार में मजबूती के साथ दस्तक देने का संकेत दिया।