मौजूदा समय की बात करें तो सबसे ज्यादा कड़े कानून यातायात को लेकर बनाए जा चुके हैं। इसके बावजूद लोग यातायात के नियम तोड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं। हाल ही में सेवलाइन फाउंडेशन द्वारा किए गए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि लगभग 47 फीसदी लोग ड्राइविंग के दौरान अपना फोन रिसीव करते हैं। सेव लाइफ एक एनजीओ है जो रोड सेफ्टी और इमरजेंसी मेडिकल केयर पर काम करती है। इस सर्वे का खुलासा इस एनजीओ ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इस सर्वे को पूरे देश में टीएनएस इंडिया द्वारा किया गया। इसका मकसद ड्राइविंग के दौरान लोगों को मोबाइल फोन के दुस्प्रभाव के बारे में जानकारी देना था।
इस अध्ययन को देश के आठ शहरों-दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, बेंग्लूरू, मैंग्लोर, कानपुर, मुंबई और कोलकाता में किया गया। इसमें 1749 ड्राइवरों से बात की गई जिसमें चार पहिया, दो पहिया चालक, ऑटो रिक्शा चालक के साथ ट्रक व बसों के ड्राइवरों को शामिल किया गया। फोन के अलावा कई और ऐसी चीजें थीं जो ड्राइवरों का ड्राइव के दौरान ध्यान भंग करती हैं जैसे कि खाना-पीना, सहयात्री से बातचीत करना, पढ़ना या फिर वीडियो देखना, रेडियो म्युजिक प्लेयर के अलावा जीपीएस सिस्टम भी उन वजहों में शामिल थे।
पूरी दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। हर घंटे लगभग 16 लोग अपनी जान भारत में गंवा रहे हैं। सिर्फ बीते एक दशक की बात करें तो देश में लगभग 13 लाख लोगों ने अपनी जान सड़क दुर्घटना में गंवाई और लगभग 53 लाख लोग इसमें अपंग हुए हैं। इसके बावजूद लोग अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। इस सर्वे के अनुसार 94 फीसदी लोगों को खतरे के बारे में पता होता है, 47 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि वो ड्राइविंग के दौरान फोन उठाते हैं, 34 फीसदी ड्राइवर मोबाइल पर बात करने के लिए अचानक ब्रेक लगाते हैं, 20 फीसदी ऐसे लोग भी मिले जो दुर्घटना से गुजर चुके हैं या फिर बाल-बाल बचे हैं।