31 मार्च को इस तरह से डीलरशिप पर लगी रही लाइन।
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इतना भारी-भरकम डिस्काउंट देने के बावजूद ऑटो कंपनियों को काफी फायदा हुआ है। टू व्हीलर इंडस्ट्री में चार फीसदी मार्जिन पर काम करने वाले डीलर अपना स्टॉक क्लीयर करके फायदे में रहे। बहुत से डीलर्स ऐसे भी थे जिन्होंने पहले से ही कंपनियों के पास से बीएस3 वाहन लेना बंद कर दिया था क्योंकि उनके पास उन वाहनों की डिमांड बीएस4 के वाहनों को देखते हुए खत्म हो गई थी। ऑटो डीलर हमेशा जो उत्पाद अपने पास रखते हैं उसका वो या तो पहले भुगतान कर चुके होते हैं या फिर बाद में भुगतान करने के लिए उन्हें तीन महीने तक का वक्त कंपनियां देती हैं। इसलिए अगर ये वाहन बचे रह जाते तो नुकसान डीलर्स का होता कंपनियों का नहीं।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल ऑफ डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट जॉन पॉल के अनुसार अभी भी कुछ ऐसे डीलर्स हैं जिनका स्टॉक क्लीयर नहीं हुआ है भले ही उन्होंने दुपहिया वाहनों पर इतना सारा डिस्काउंट ऑफर दिया हो। फिर भी इस तरीके से कंपनियों को काफी स्टॉक निकल गए हैं।
इन दो दिनों में हुई बिक्री का आंकड़ा फिलहाल सोमवार को आएगा। पर अलग-अलग शहरों के मुताबिक मिले आंकड़ों से यह स्पष्ट हो जाता है कि लगभग 90 फीसदी तक का स्टॉक कंपनियों का खत्म हो चुका है। भले ही कंपनियों ने अपनी गाड़ियों पर इतना सारा डिस्काउंट दिया फिर भी वो फायदे में रही हैं। एक डीलर के मुताबिक यह रणनीति होती है और कोई भी कंपनी कभी भी घाटे में कोई काम नहीं करती। पर हां जिस स्टॉक पर कंपनियों को बड़ा मुनाफा होना था उसमें 50 फीसदी की कमी जरूर आई है।
खबरों के मुताबिक महज तीन घंटे के अंदर कई डीलर्स ने अपने गेट पर आउट ऑफ स्टॉक का बोर्ड लगा दिया था। दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई में घंटों लोग बीएस3 वाहनों को पाने के लिए एक डीलरशिप से दूसरे डीलरशिप का चक्कर काटते रहे।