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खत्म हो रहा है डीजल कारों का वर्चस्व

Sat, 18 Feb 2017 03:52 PM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डीजल
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अब डीजल कारों की लोकप्रियता का भूत लोगों के सिर से उतरने लगा है। बीते पांच वित्त वर्ष में डीजल कारों की मांग में तेज गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोल व डीजल के कीमत के बीच अब ज्यादा अंतर नहीं रह गया है ऊपर से डीजल कारों को खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, साथ ही डीजल कारों का मेनटेनेंस ज्यादा होता है व इन्हें हर दिन लगभग 50 किलोमीटर चलाना जरूरी होता है अगर इन्हें सही सलामत रखना है तो। इन सारे कारकों के बीच डीजल कारों की मांग खत्म होती जा रही है। 
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हौंडा के पास डीजल इंजन नहीं था और कंपनी ने आनन-फानन में आईडीटेक डीजल इंजन के निवेश पर देश में लगभग 500 करोड़ रुपये निवेश किए। कंपनी की अमेज कार को काफी लोकप्रियता भी मिली लेकिन अब कंपनी को अपना यह दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में माना जा रहा है कि ऑटो कंपनियां अपने डीजल इंजिन के रणनीति को बदल सकती हैं। इसकी शुरुआत हौंडा ने कर भी दी है यहां बने डीजल इंजिन के उपकरणों को कंपनी ब्रिटेन में निर्यात करना भी शुरू कर चुकी है। 
     
मारूति सुजुकी सेलारियो डीजल का प्रोडक्शन मारूति ने चुपचाप बंद कर दिया था, अब तक कंपनी ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन मांग न होने के कारण कंपनी ने डीलरों को इस कार की सप्लाई बंद करते हुए अपने वेबसाइट से इसकी कीमत को हटा दिया। सियाम के आंकड़े बताते हैं कि 2012-13 से ही डीजल कारों की मांग में गिरावट शुरू हो गई थी और इस साल डीजल कारों की मांग में 27 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 
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सियाम के डायरेक्टर जनरल विष्‍णु माथुर कहते हैं कि अब यह ट्रेंड बदल रहा है। छोटे खरीदारों को पेट्रोल कारों में ज्यादा मुनाफा दिखाई दे रहा है। डीजल कारों के प्रशंसक अब बड़ी कारों की ओर बढ़ रहे हैं तो वहीं छोटी डीजल कारों के शौकीन पेट्रोल कारों में अपनी दिलचस्पी ज्यादा दिखा रहे हैं। 
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