दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में 100-फुट चौड़ी 500 किलोमीटर की सड़कों को यूरोप के शहरों की तरह रीडिजाइन करेगी। आधिकारिक तौर पर मंगलवार को एक बयान में इस बारे में जानकारी दी गई।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यूरोपीय शहरों की तर्ज पर दिल्ली में सात सड़कों को नए सिरे से बनाने के संबंध में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की समीक्षा बैठक की।
बयान में कहा गया, "बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि दिल्ली की सभी 100 फुट चौड़ी सड़कें, कुल 500 किलोमीटर, पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार और नए सिरे से तैयार की गई चांदनी चौक की मुख्य सड़क की तर्ज पर बनाई जाएंगी।"
मुख्यमंत्री ने पीडब्ल्यूडी से तीन सप्ताह में विस्तृत योजना देने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, "दिल्ली देश की राजधानी है। इस परियोजना के जरिए, यह हमारा सपना है कि दिल्ली अन्य वैश्विक राजधानी शहरों की तरह दिखे। यह दुनिया में भारत की बेहतर छवि पेश करेगा।"
दिल्ली की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग विदेश से दिल्ली आते हैं और अगर यहां की सड़कें सुंदर और भीड़-मुक्त हैं, तो भारत की एक अलग छवि दुनिया के सामने पेश होगी।
केजरीवाल ने कहा, "हम इन सड़कों के किनारे हरियाली भी बढ़ाएंगे, जिससे हमें प्रदूषण से निपटने में मदद मिलेगी।" बयान में कहा गया है कि बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर सड़कों को फिर से डिजाइन किया जाएगा और निर्माण कंपनी की जिम्मेदारी 15 साल तक सड़कों को बनाए रखने की होगी।
बयान के मुताबिक पहले सात सड़कों को रीडिजाइन करने की समय सीमा दिसंबर 2019 थी, लेकिन महामारी के कारण इसे अगस्त 2021 तक बढ़ा दिया गया है।
संकरी सड़कों की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह शहर के विभिन्न स्थानों पर ट्रैफिक जाम का कारण बनती हैं। दिल्ली के कई हिस्सों में चौड़ी सड़कें संकरी हो जाती हैं और फिर कुछ किलोमीटर के बाद फिर से चौड़ी सड़कों में तब्दील हो जाती हैं, जिससे भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है।
बयान में कहा गया है कि यातायात के सुचारू प्रवाह और संगठित लेन प्रणाली के लिए सबसे पहले इन अड़चनों को दूर करना प्राथमिकता होगी।
इसके बाद अगला लक्ष्य शहर में सड़कों की मौजूदा जगह की दक्षता को बढ़ाना होगा। वाहनों, गैर-मोटर चालित वाहनों, फुटपाथों और साइड-लेन के लिए मापी और नियोजित जगहें होंगी। पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुटपाथों की औसतन 10 फीट की दूरी तय की जाएगी।
धूल को नियंत्रित करने के लिए किसी भी सतह को खुला नहीं छोड़ा जाएगा। बयान में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि सड़कों पर धूल नहीं हो, घास और छोटे पौधे लगाई जाएंगे।
शारीरिक रूप से विकलांगों की सुविधा के लिए मानक ऊंचाई के अनुसार फुटपाथों को फिर से डिजाइन और पुनर्निर्माण किया जाएगा। सड़कों पर वृक्षारोपण और ई-वाहनों और ऑटो के पार्किंग के लिए अलग स्थान और एक साइकिल लेन भी होगी।
जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सड़कों, साथ ही नालियों की ढलान को फिर से तैयार किया जाएगा। रेनवाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर ड्रेनेज सिस्टम के अंदर बनाए जाएंगे।
बयान में बताया गया कि सड़क के किनारे दीवारों पर विभिन्न प्रकार के डिजाइन बनाए जाएंगे।