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बस अब नहीं चलेगा कोई ‘जुगाड़’, अदालत ने दिए सख्ती बरतने के आदेश

Fri, 26 Jul 2019 04:53 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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मोटर साइकिल से बनाई जुगाड़ में ड्रम लादकर ले जाता युवक। - फोटो : अमर उजाला
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हमारे देश में ‘जुगाड़’ शब्द बेहद प्रचलित है। कुछ ही खऱाब हो जाए, तो सबसे पहले ‘जुगाड़’ ही ढूंढते हैं। लेकिन इसके अलावा हमारे देश में एक ‘जुगाड़’ और भी है, जो हादसों का सबब बनता है। देश की सड़कों पर दौड़ते तिपहिया ‘जुगाड़’ वाहन, जिन्हें अलग-अलग वाहनों के कलपुर्जे जोड़ कर बनाया जाता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इन्ही ‘जुगाड़’ पर चिंता जाहिर करते हुए, सख्ती बरतने का आदेश दिया है। 

हाइब्रिड रिक्शा पर हो कार्रवाई

कुछ लोग इन्हें हाइब्रिड रिक्शा भी बोलते हैं, जो सामान के साथ सवारियां ढोने का भी काम करते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो इनकी भरमार है। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि इनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की बेंच ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान ये आदेश जारी किया।

नहीं है रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस

याचिका में आरोप लगाया है कि जोड़तोड़ करके बनाए गए ये हाइब्रिड वाहन बिना रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यहां तक कि इन्हें चलाने वालों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है। इस आदेश के साथ ही दिल्ली निवासी शिव कुमार की याचिका का निपटारा किया,  जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया कि ‘जुगाड़’ को मोटर यान अधिनियम के दायरे में लाया जा चुका है, लेकिन उनके रेगुलेट करने के लिये कोई दिशानिर्देश जारी नहीं हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2013 में दिया था आदेश

याचिकाकर्ता के वकील राजदीपा बेहुरा ने बेंच से कहा कि या तो इन पर पाबंदी लगाए जाए, अथवा ई-रिक्शा की तरह इन्हें रेगुलेट करने के लिए गाइडलाइंस जारी की जाएं। केंद्र सरकार के वकील रवि प्रकाश और परिवहन मंत्रालय की तरफ से पेश फरमान अली मागरे ने अदालत को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के मई 2013 में जारी आदेश की अनुपालना कर रहा है, जिसमें अदालत ने यह सुनिश्चित करने को कहा था कि ‘जुगाड़’ को मोटर व्हीकल एक्ट की जरूरतों को पालन किये बिना चलाने की अनुमति नहीं दी जाए।

राज्यों को भेजा सर्कुलर

दोनों वकीलों ने उच्च न्यायालय को बताया कि मंत्रालय ने पहले ही सभी राज्यों सरकारों को सर्कुलर जारी करके इन ‘जुगाड़’ के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा है। शिव कुमार ने अपनी याचिका में कहा था कि दूसरे वाहनों के कलपुर्जे जोड़ कर, जिसमें मोटरसाइकिल के टायर, बजाज स्कूटर के इंजन और हैंडल को रिक्शा की बॉडी में फिट किया जाता है, जिसके बाद उन पर भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामान ढोया जाता है।         

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