देश में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर साल औसतन डेढ़ लाख लोग, सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। आम नागरिकों के अलावा देश की कई बड़ी हस्तियां भी इन्हीं हादसों में जान खो चुकी हैं। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, कद्दावर नेता राजेश पायलट, केंद्रीय मंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा से लेकर टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री तक यह फेहरिस्त काफी लंबी है। देश में सितंबर 2019 से लागू हुए नए मोटर वाहन अधिनियम में चालान राशि में कई गुना इजाफा किया गया। इसके बाद उम्मीद बंधी थी कि अब वाहन चालक संभल कर चलेंगे और सड़क हादसों में कमी आ जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एनसीआरबी का नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि गत वर्ष चार लाख से ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 1.55 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि 3.71 लाख लोग घायल हो गए।
मिस्त्री के मामले की जांच कर रहा 'सेव लाइफ फाउंडेशन'
महाराष्ट्र सरकार ने टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री के मामले की जांच 'सेव लाइफ फाउंडेशन' को सौंपी है। मिस्त्री का रविवार को मुंबई के पालघर में हुए एक सड़क हादसे में निधन हो गया था। ये हादसा उस वक्त हुआ, जब सायरस मिस्त्री अपनी मर्सिडीज कार में अहमदाबाद से मुंबई लौट रहे थे। उनकी कार एक डिवाइडर से टकरा गई थी। इस केस की गहन जांच पड़ताल की जा रही है। सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे 'सेव लाइफ फाउंडेशन' के अध्यक्ष पीयूष तिवारी कहते हैं, सड़क हादसे होने की कई वजह हैं। स्पीड ज्यादा थी, सीट बेल्ट नहीं लगी थी, ये अभी प्रारंभिक जांच में सामने आ रहा है। इस केस में इंजीनियरिंग भी एक बड़ा इश्यू रह सकता है। संबंधित गाड़ी का कंप्यूटर मुहैया कराने की मांग रखेंगे।
दो-तीन साल बाद सड़क हादसों में आएगी गिरावट
पहले सड़क हादसों के मामले में सारा डाटा उपलब्ध नहीं होता था। भारत सरकार ने गत वर्ष सड़क हादसों में 1.55 लाख लोगों के मारे जाने की बात कही है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में यही डाटा दो-ढाई लाख तक पहुंच सकता है। सड़क हादसे कैसे कम हों, इसे लेकर जो प्रक्रिया अपनाई गई है, उसमें सुधार की गुंजाइश है। ऐसा संभव है कि अभी दो-तीन साल यह संख्या बढ़ती रहे, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट दर्ज होगी। पीयूष तिवारी कहते हैं, अब देखिये, कोविड में क्या हुआ। बहुत से लोगों ने अपने निजी वाहनों में चलना शुरू कर दिया। ऑटो इंडस्ट्री में बूम आया। वाहनों की जमकर बिक्री हुई। हाइवे पर प्रति कार यूनिट का आंकड़ा बढ़ता चला गया। सड़क का ज्यादा इस्तेमाल होने लगा। वाहनों की स्पीड बढ़ती रही। 2017 में 1,47,913 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए थे। 2018 में 1,51,471 लोगों की जान गई थी।
कहीं पर क्रैश बेरियर नहीं है तो कहीं ब्रिज वॉल गायब
खास बात ये है कि वाहनों की बिक्री और रफ्तार तो खूब बढ़ गई, मगर सड़कें सुरक्षित कैसे हों, सड़क हादसों में मौत कम से कम हों या घायल होने से लोग बच जाएं, इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कोई काम नहीं किया गया। बहुत से हादसे ऐसे भी होते हैं, जो खराब रोड इंजीनियरिंग के चलते होते हैं। सड़क के एक हिस्से पर क्रैश बैरियर नहीं है, तो दूसरी जगह से ब्रिज वॉल गायब है। इसके बाद वाहन चालकों का व्यवहार, इसमें कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा 15 राज्यों में यह स्टडी कराई जा रही है कि वहां पर सड़क हादसों में हुई 85 फीसदी मौत का कारण क्या है। इसमें 30 से 50 फीसदी तक हजारों इंजीनियरिंग इश्यू सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के एक हिस्से में दो सौ किलोमीटर रोड का सर्वे किया गया, तो वहां पर इंजीनियरिंग से संबंधित 14 हजार इश्यू मिले हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सड़क हादसे के लिए केवल ड्राइवर ही जिम्मेदार नहीं होता।
केवल 12 राज्यों ने ही नए एक्ट को नोटिफाई किया है
केंद्र सरकार ने सितंबर 2019 में नए मोटर वाहन अधिनियम को अधिसूचित किया था। सड़क यातायात के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जाने लगा। केंद्र सरकार ने तो इसे अधिसूचित कर दिया, लेकिन सभी राज्यों ने इस प्रक्रिया में तेजी नहीं दिखाई। 12 राज्यों ने इस एक्ट को नोटिफाई किया है। महाराष्ट्र ने तो इसी साल किया है। इसके आधार पर राज्यों को जो कानून बनाए जाने चाहिएं थे, वे नहीं बनाए गए। नए प्रावधान, 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिश पर तैयार किए गए थे। पिछले दो साल से तो इस दिशा में कुछ भी काम नहीं हुआ। जुर्माना राशि बढ़ाना, इसमें बात मुख्य तौर से दंड की बात शामिल होती है। इसमें यह देखा जाता है कि उल्लंघनकर्ता के पकड़े जाने की संभावना कितनी है। अगर वाहन चालक के दिमाग से यह डर निकल जाता है, तो बढ़ी हुई चालान राशि का कोई फायदा नहीं होगा। कोई भी राज्य इस दिशा में काम नहीं कर रहा। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सेलेक्टिव जगह पर लगे हैं। इससे भी वाहन चालकों के दिमाग में डर नहीं रहता।
नए एक्ट में किया गया था भारी जुर्माने का प्रावधान
संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट में अगर शराब पीकर ड्राइविंग करने का मामला साबित होता है, तो चालक पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगता है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पीसीआर का रास्ता रोकने पर भी 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बिना हेलमेट पकड़े जाने पर तीन माह के लिए लाइसेंस सस्पेंड होता है। ओवर स्पीड और बिना बीमा पॉलिसी के गाड़ी चलाने पर भी दो हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। नाबालिग, गाड़ी चलाता हुआ पकड़ा गया, तो वाहन मालिक और अभिभावक, दोनों को कसूरवार ठहराया जाएगा। इसमें तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द होने का भी प्रावधान है। ट्रैफिक सिग्नल के उल्लंघन पर 500 रुपए जुर्माना होगा। दोबारा यह उल्लंघन होने पर जुर्माना राशि दो हजार रुपये तक पहुंच सकती है। हिट एंड रन केस में पीड़ित परिवारों को दो लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाना, यह जुर्माना भी 100 रुपये से बढ़ा कर 1000 रुपये कर दिया गया है। ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन पर बात करना, इस उल्लंघन पर 5000 रुपये जुर्माना देना पड़ेगा।