गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कदम व्यक्ति-से-व्यक्ति के संपर्क को कम कर वायरस को फैलने से रोकने की संभावनाओं को कम करना है। उन्होंने कहा, "हमने ब्रेथ-एनालाइजर उपकरण के इस्तेमाल को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया है।"
अधिकारी ने कहा कि यह वास्तव में पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बेहत उपयोगी उपकरण है, जो जांच के दौरान इस उपकरण का उपयोग करते हैं। हालांकि, पुलिस कर्मियों द्वारा वाहनों की नियमित जांच जारी रहेगी।
महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) विनय करगांवकर ने इस संबंध में एक सर्कुलर सोमवार को जारी किया।
सर्कुलर में कहा गया, "राज्य में कोरोनावायरस का प्रकोप बताया गया है। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए, पुलिस कर्मियों को उसके मुताबिक एहतियाती उपाय करने की जरूरत है। इसलिए, सभी पुलिस इकाइयों में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मोटर चालकों द्वारा शराब की जांच के लिए ब्रेथ-एनालाइजर परीक्षण नहीं करना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद यह परीक्षण फिर से शुरू किया जाएगा। करगांवकर ने नागपुर में पीटीआई को बताया कि कोरोनो वायरस संक्रमण के आगे फैलने से रोकने के लिए यह फैसला किया गया।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को संक्रमण का खतरा है, क्योंकि उन्हें ब्रेथ-एनालाइजर उपकरण को मोटर चालकों के मुंह में रखना होता है ताकि यह जांचा की जा सके कि कहीं वे नशे में तो गाड़ी नहीं चला रहे।
इस बीच, गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि हालांकि 2015 में नशे में ड्राइविंग के मामलों की संख्या 18,000 से घटकर 2018 में 11,700 हो गई है, फिर यह संख्या बहुत ज्यादा है।