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इलेक्ट्रिक कारों की दौड़ में पटरी से उतर सकता है मौजूदा कारों का भविष्य

Mon, 29 Jul 2019 09:55 AM IST
‌डिंपल अलवधी ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में अधिकतर कार कंपनियों ने अपनी बिक्री में 18 फीसदी से ज्यादा की गिरावट बताई है। भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बीते एक साल से गिरावट का दौर जारी है। दूसरी ओर, जीएसटी परिषद ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी करने के साथ यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार का पूरा जोर ई-वाहन को बढ़ावा देने पर है। हालांकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ेगी तो इसका सीधा असर मौजूदा ऑटोमोबाइल सेक्टर पर होगा और पेट्रोल व सीएनजी कारों का भविष्य पटरी से उतर सकता है।

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खुद कार कंपनियां गिरावट की वजह लोगों के बीच कैश की कमी और जीएसटी की ऊंची दरों को मान रही हैं। जहां सरकार ने इलेक्ट्रिक कारों पर जीएसटी दर एक दिन पहले ही 12 फीसदी से घटकर पांच फीसदी कर दी है, वहीं पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और हाईब्रिड वाहनों कारों पर यह 28 फीसदी है। इसके अलावा कारों की क्षमता के अनुसार इन पर एक से 22 फीसदी तक सेस और 29 से 50 फीसदी तक ड्यूटी भी ली जाती है। कार कंपनियां चाहती हैं कि जीएसटी की दरें कम हों, जिससे ऑटोमोबाइल उद्योग को उबरने का अवसर मिले।

सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी

सरकार ने अपने ताजा आर्थिक सर्वे में साफ किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को भावी पीढ़ी का परिवहन माध्यम मान रही है। वह चाहती है कि भारत इसी पर जोर दे, ताकि देश में 2020 तक इन वाहनों की संख्या 70 लाख तक पहुंच सके। सरकार सहयोगी वातावरण भी तैयार कर रही है। वाहनों के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जा रहा है। नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान 2020 (एनईएमएमपी) तैयार किया गया था, जिसका दूसरा चरण एक अप्रैल 2019 से शुरू हो चुका है। इसमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये अगले तीन वर्ष में खर्च होंगे। फिलहाल देश में 0.6 फीसदी वाहन ही बिजली पर चल रहे हैं, बाकी जीवाश्म ईंधन और सीएनजी पर। नार्वे जैसे देश में इनकी संख्या 39 फीसदी है।

नीति आयोग के लक्ष्य भी गलत नहीं

विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल देश के 14 शहरों के हालात सुधारने के लिए नीति आयोग चाहता है कि इलेक्ट्रिक वाहन अपनाए जाएं। उसके अनुसार अगर 2030 तक अगर 30 फीसदी प्राइवेट कारें, 70 फीसदी कॉमर्शियल कारें, 40 फीसदी बसें और 80 फीसदी दो व तीन पहिया वाहन बिजली से चलाए जाएं तो देश में 84.6 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन रुकेगा। हम 47.4 करोड़ टन पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम पाएंगे, इसका फायदा अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

उपभोक्ता को सालाना 25 हजार का लाभ

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाकर यूरोपीय यूनियन अपनी आर्थिक विकास दर में एक फीसदी इजाफे की उम्मीद कर रही है। हर वाहन से लोगों को 20 से 25 हजार रुपये सालाना का फायदा होगा। ऐसा ही फायदा भारत को भी मिल सकता है। आयोग के अनुसार देश के 17 करोड़ दोपहिया वाहन साल में औसतन 200 लीटर पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं। यह करीब 2.4 लाख करोड़ का खर्च है। अगले पांच से सात वर्ष में अगर भारत इसमें 50 फीसदी की कमी लाने में सफल रहा तो यह बड़ा आर्थिक लाभ होगा। इन वाहनों के लिए नई यूनिट्स लगाने और कंपनियों को विकसित होने का अवसर मिलेगा। यह वैश्विक स्तर पर अपने उत्पाद निर्यात के काबिल होंगी और इनसे रोजगार के भी नए अवसर पैदा होंगे।

इधर, गिरावट से ढलान पर मौजूदा कारें

लेकिन इन सबके बीच 2019-20 की पहली तिमाही में ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिक्री में आई भीषण कमी ने नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। तीन महीनों में 18.27 फीसदी कारें तो कम बिकी ही, दोनों वर्षों में जून महीने की बिक्री में भी यह गिरावट 17.54 फीसदी रही। भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर सोसाइटी के अनुसार मई महीने में 20.55 फीसदी की गिरावट हुई थी। पिछले वर्ष मई में 3.01 लाख कारें बिकी थीं तो इस वर्ष केवल 2.39 लाख। 

चिंता के और भी कारण

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिल रहे सरकार के समर्थन और विश्व के चौथे बड़े भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में गिरावट के बीच यह चिंताएं बढ़ रही हैं कि इसका भविष्य क्या होगा? पिछले वित्त वर्ष सेक्टर ने 6.26 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी और 3.09 करोड़ वाहन बनाए थे। वहीं निर्यात में भी 14.50 फीसदी की वृद्धि हुई थी, हालांकि इसमें भी कारों और दोपहिया वाहनों में 9.64 फीसदी गिरावट आ चुकी थी। भारत में 40 लाख इकाइयां इस सेक्टर पर निर्भर है। ऑटोमेटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार 50 लाख नागरिकों को उनका क्षेत्र रोजगार देता है। मौजूदा हालात में इसे 10 से 15 फीसदी गिरावट की आशंका है।

पांच प्रमुख कार कंपनियों की हालत


मारुति : सबसे बड़ी गिरावट
 

अवधि     2018     2019     गिरावट
जून में 1.44 लाख 1.24 लाख 14 फीसदी
पहली तिमाही में 4.90 लाख  4.02 लाख   17.9 फीसदी

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ह्यूंडई : नए मॉडल लॉन्च से बहुत फायदा नहीं
 

अवधि     2018     2019     गिरावट
जून     45 हजार 42 हजार 7.3 फीसदी
पहली तिमाही में   1.37 लाख 1.26 लाख  8.02 फीसदी



महिंद्रा : एक मात्र कंपनी टिकी रही
 

अवधि 2018     2019     वृद्धि
जून     15.9 हजार   17.8 हजार 11.94 फीसदी
कुल     54.9 हजार  56.3 हजार  2.55 फीसदी



टाटा : बड़ा नुकसान
 

अवधि 2018     2019     गिरावट
जून  18.2 हजार 13.3 हजार   26.9 फीसदी
कुल 52.8 हजार 36.8 हजार  30.30 फीसदी



होंडा : जून में सर्वाधिक गिरावट
 

अवधि     2018 2019 गिरावट
जून 17.6 हजार 10.3 हजार 41.47
कुल      42.5   32.9  22.58    

 

कुल : पिछले वर्ष से 1.57 लाख कारें कम बिकीं तीन महीने में
 

अवधि     2018     2019     गिरावट
जून     2.68 लाख 2.21 लाख 17.53
कुल     8.59 लाख   7.02 लाख 18.27

 

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