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चोरों के निशाने पर हैं ये खास गाड़ियां, बढ़ते दावों से इंश्योरेंस कंपनियों की उड़ी नींद

Sun, 15 Sep 2019 01:48 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Car Theft/stolen
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ऑटो सेक्टर में छाई मंदी के बीच पिछले महीने अच्छी खबर आई थी कि केवल एसयूवी सेगमेंट ही ऐसा है जिसकी बिक्री में स्थिरता बनी हुई है। लेकिन इंश्योरेंस कंपनियों के लिए एसयूवी बड़ा सिरदर्द बन रही हैं। इसकी वजह है कि पिछले कुछ वक्त से एसयूवी गाड़ियों की चोरी में इजाफा हुआ है।

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15 से 20 फीसदी तक इजाफा

चोरों की पहली पसंद ह्यूंदै क्रेटा, मारुति सुजुकी विटारा ब्रेजा, महिंद्रा स्कॉर्पियो, टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी एसयूवी हैं। इंश्योरेंस कंपनियों का कहना है कि इस वित्त वर्ष में ऐसी गाड़ियों की चोरी के मामलों में 15 से 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है और उन्हें इसके लिए ज्यादा क्लेम चुकाने पड़ रहे हैं। कंपनियों के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल 10 हजार ज्यादा एसयूवी चोरी हो चुकी हैं।

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चोरी की गाड़ियों का क्लेम 1,000 रुपये

कंपनियों के मुताबिक भारत में बीमा की हुईं 100 गाड़ियों में से केवल 35-40 का ही क्लेम फाइल किया जाता है, वहीं आमतौर पर दो फीसदी से कम बीमा वाली कारें ही चोरी होती हैं। हर साल तकरीबन 35 हजार करोड़ रुपये के क्लेम फाइल किए जाते हैं, जिनमें से एक हजार करोड़ रुपये के क्लेम केवल चोरी हुए वाहनों के होते हैं।

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एमजी हेक्टर और किआ सेल्टोस भी निशाने पर

इनमें से ब्रेजा और क्रेटा चोरों की पहली पसंद है और इनमें से दो हजार क्लेम इन्हें गाड़ियों के हैं। वहीं ऑटो सेक्टर की बेस्ट सेलिंग एसयूवी ह्यूंदै वेन्यू, ब्रेजा, क्रेटा और महिंद्रा बोलेरो है। वहीं हाल ही में लॉन्च हुई एमजी हेक्टर और किआ सेल्टोस भी चोरों के निशाने पर हैं। गौरतलब है कि एसयूवी सेगमेंट में छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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ऑटोमैटिक वेरियंट्स और कीलेस एंट्री वाली कारें निशाने पर

बीमा कंपनियों से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक कारों में आने वाली कीलेस एंट्री चोरों के निशाने पर है, ये उनका सॉफ्ट टारगेट हैं। कीलेस एंट्री वाली एसयूवी और कारों की 20 फीसदी ज्यादा रीसेल वेल्यू मिलती है। वहीं डीजल वाहनों की भी अच्छी रीसेल वेल्यू मिलती है। साथ ही, चोरों के निशाने पर ऑटोमैटिक वेरियंट्स वाली गाड़ियां भी होती हैं।

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हैकिंग डिवाइस से करते हैं चोरी

2017 से पहले चोर केवल उन्हीं वाहनों को चुराना पसंद करते थे, जो साधारण चाभियों के साथ आती थीं और उनमें इमोबिलाइजर नहीं लगा होता था। लेकिन जैसे ही कीलेस एंट्री वाली कारें आना शुरू हुईं तो चोरों ने विंडो तोड़ कर हैकिंग डिवाइसेज की मदद से गाड़ी चुराना शुरू कर दिया। वहीं खास बात यह है कि चोरी के ज्यादातर मामले पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों के मुकाबले उत्तरी इलाकों में ज्यादा हैं। दिल्ली-एनसीआर चोरी के मामलों में अव्वल है और यहां चोरी हुई ज्यादातर गाड़ियां उत्तर प्रदेश, उत्तर पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर में बेची जाती हैं।

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कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट है पसंद

चोर केवल उन्हीं गाड़ियों को निशाना बनाते हैं जो काफी पॉपुलर हैं खासतौर पर कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट उनका पसंदीदा है, क्योंकि इन्हें प्राइवेट और कमर्शियल दोनों तरह से प्रयोग किया जा सकता है। यहां तक कि इमोबिलाइजर लगी गाड़ियों का भी चोर कोड तोड़ लेते हैं। ह्यूंदै, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे कार कंपनियां इंश्योरेंस कंपनियों, पुलिस, डीलर्स पाटर्नर्स के साथ लगातार संपर्क में रहती हैं, ताकि चोरी के तरीकों का तोड़ निकाला जा सके।
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ह्यूंदै वेन्यू है सुरक्षित

हाल ही में लॉन्च ह्यूंदै वेन्यू में इनबिल्ट ट्रैकिंग सिस्टम के साथ नोटिफिकेशन अलर्ट, इमोबिलाइजर और ज्योफेंसिंग का फीचर दिया गया है। जैसे ही कोई कार को चुराने की कोशिश करता है, वैसे ही नोटिफिकेशन अलर्ट के जरिए कार का अलार्म बजना शुरू हो जाता है। ह्यूंदै तक 18 हजार गाड़ियां बेच चुकी हैं लेकिन किसी के भी चोरी होने का मामला दर्ज नहीं हुआ है।        
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डीलर भी लगा रहे हैं एंटी-थेफ्ट डिवाइसेज

इसके अलावा कई डीलर भी कारों में एंटी थेफ्ट डिवाइसेज लगा रहे हैं, जिन्हें खरीदने के दौरान लगाया जा सकता है और इनकी कीमत 5000 रुपये तक है। बीमा कंपनियों के मुताबिक अगर सभी डीलर एकजुट हो कर एंटी थेफ्ट डिवाइसेज लगाना शुरू कर दें और चोरी की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है। इसके लिए बीमा कंपनियां ऑटोमोबाइल ट्रेडर्स असोसिएशऩ, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटीज और पुलिस के साथ मिल कर चोरी के मामलों में कमी लाने की कोशिशों में जुटी हुई हैं।

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इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरियां निशाने पर

इसके लिए कार निर्माता कंपनियों ने डीलर्स के जरिए डुप्लीकेट चाभियों बनवाने की प्रक्रिया को मुश्किल कर दिया है। कुछ कारों में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेसर्स भी लगाए जा रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि चोर केवल पेट्रोल या डीजल इंजन वाली कारें ही चुरा रहे हैं। उनका निशाना इलेक्ट्रिक वाहन भी हैं। दिल्ली में सबसे ज्यादा ई-रिक्शा की बैटरियां चोरी होती हैं क्योंकि बैटरियां ही सबसे महंगी होती हैं। वहीं बैटरियों को रिप्लेस करने का खर्च भी ज्यादा होता है। लेकिन एक बार अगर इन गाड़ियों में भी ट्रैकिंग फीचर लग गया तो इनकी चोरी पर भी लगाम कसना आसान हो जाएगा।                
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