यात्री वाहनों की बिक्री में भारत में काफी तेज दिख रही है। भले ही नोटबंदी के असर ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को झकझोर दिया हो इसके बावजूद इस इंडस्ट्री में ग्रोथ के अच्छे संकेत दिख रहे हैं। 7वें बेतन आयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में लौट रहे सकारात्मक रवैये के चलते उम्मीद की जा रही है कारों की बिक्री में तेज बढोत्तरी होगी। आने वाले पांच सालों में 9 से 11 फीसदी वृद्वि की उम्मीद की जा रही है। इस वृद्वि की दो बड़ी वजहें ईंधन की कीमतों में आने जा रही कमी और कम ब्याज दरें भी हो सकती हैं।
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सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर सियाम के अनुसार नोटबंदी के बावजूद कारों की बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई है और पहली बार ऐसा हुआ है जब 30 लाख से अधिक कारें एक वित्त वर्ष में भारतीय बाजार में बिकी हैं। रिसर्च आर्म ऑफ रेटिंग एजेंसी ICRA Ltd की मानें तो मौजूद वित्त वर्ष में कारों की बिक्री 9 से 10 फीसदी तक बढ़ेगी जबकि आने वाले पांच सालों में इसके 9 से 11 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है।
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इस बढ़ोत्तरी में मौजूदा इन कारकों के अलावा मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड, रेनो, हुंडई और टाटा का बड़ा योगदान होगा। इन कार कंपनियों की कारों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज ही जा रही है। इंडस्ट्री से मिल रही जानकारी के मुताबिक टाटा मोटर्स को नए मॉडलों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों से काफी अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अप्रैल माह में कंपनी ने जबर्दस्त बिक्री दर्ज की है। हालांकि महिंद्रा को बाजार में मजबूती के लिए अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। रेनो अपनी क्विड के जरिए एंट्री लेवल सेगमेंट में बड़ा गेम खेल रही है। मारुति के जैसे रणनीति बनाकर काम कर रही रेनो को फिलहाल बाजार का पूरा समर्थन मिल रहा है।