उड़ गई थी नींद
डीलर्स का कहना है कि इन वाहनों ने हमारी रातों की नींदे उड़ा दी थीं, क्योंकि लॉकडाउन के चलते कंपनियों के शोरूम बंद हैं और सरकार पहले ही एक मई तक बीएस4 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की समयसीमा तय कर चुकी है, ऐसे में ये सभी वाहन कबाड़ हो जाते। उनका कहना है कि इन वाहनों को कबाड़ होने से बचाने और नुकसान कम करने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। आलम यह है कि एक-एक व्यक्ति के नाम पर 15 गाड़ियां तक रजिस्टर कराई गई हैं। यहां तक कि महिलाओं के नाम पर कई-कई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है।
ग्राहकों के लिए फायदेमंद
ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह लीगल तरीका है जिससे डीलर्स को ज्यादा नुकसान नहीं सहना पड़ेगा। ऐसे वाहनों को वाजिब कीमत पर सेकंड-हैंड वाहनों के तौर पर बेचा जा सकता है। अगर कोई ग्राहक फिलहाल कीमत का 30 फीसदी चुकाने की स्थिति में नहीं है, तो वह बाद में 20 फीसदी चुका कर यूज्ड गाड़ी के तौर पर खरीद सकता है। इस तरह से डीलर 10 फीसदी तक बचा सकते हैं। वहीं बीएस4 स्टॉक को सेकंड हैंड की तरह बेचना डीलर और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। क्योंकि ग्राहक अगर सेकंड हैंड रजिस्टर्ड व्हीकल खरीदता है, तो उसे 0 किमी चला हुआ बिल्कुल नया वाहन मिलेगा। वहीं एक अप्रैल 2020 के बाद वैसे ही बीएस6 वाहनों की कीमतों में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी होनी है, ऐसे में वह नई कीमत चुकाने से बच जाएगा।