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इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार की जल्दबाजी से नाराज ऑटो कंपनियां, कहा टूट जाएगी ‘रीढ़’

Mon, 10 Jun 2019 04:23 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Honda Plant Factory - फोटो : सांकेतिक
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ऑटो सेक्टर ने सरकार पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। ऑटो सेक्टर का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर सरकार जल्दबाजी कर रही है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स यानी सियाम को इस मुद्दे पर सीआईआई का भी सहयोग मिल रहा है।

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2025 तक 150सीसी से नीचे के दोपहिया वाहनों पर बैन

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज इंडस्ट्री यानी सीआईआई का कहना है कि ग्रीन मोबिलिटी का लक्ष्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों से ही हासिल नहीं किया जा सकता। ऑटो सेक्टर की यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है जब सरकार साल 2023 तक पेट्रोल और डीजल से चलने वाले तिपहिया वाहनों और साल 2025 तक 150सीसी से नीचे के दोपहिया वाहनों पर बैन लगाने की योजना बना रही है।
 

फ्यूल एफिशियंट टेक्नोलॉजी को अनुमति दे

सीआईआई का कहना है कि आगे बढ़ने के लिए सभी प्रकार की तकनीक के लिए खुलापन होना जरूरी है, लेकिन सरकार से अपील है कि वह टेक्नोलॉजी को लेकर नास्तिक दृष्टिकोण न रखे। उसका कहना है कि सरकार सुरक्षा और गुणवत्ता मानक पूरे करने वाली फ्यूल एफिशियंट टेक्नोलॉजी को अनुमति देनी चाहिए।
 

ऑटो टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध लगाना प्रैक्टिकल नहीं

वहीं सियाम के प्रेजिडेंट राजन वढेरा ने सरकार पर तीखा हमला हमला बोलते हुए कहा कि ग्रीन टेक्नोलॉजी को लेकर इलेक्ट्रिक कारों को जरूरी बनाने से इस सपने को झटका लग सकता है और इसके लिए प्रैक्टिकल दृष्टिकोण जरूरी है, ताकि ऑटो सेक्टर को कोई नुकसान न पहुंचे।  उनका कहना है कि अगले 5-6 सालों में पहले से परिपक्व हो चुकी ऑटो टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध लगाना बिल्कुल भी प्रैक्टिकल नहीं है।
 

कंपोनेंट बनाने वाले होंगे प्रभावित

सियाम का कहना है कि इस तरह की अव्यवहारिक उम्मीदों वाली नीतियों से दुनिया की नंबर वन दो पहिया-तिपहिया उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जो इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बाजार और ग्राहक को मंजूर नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार के इस तुरंत वाले फैसले से कंपोनेंट या यानी कलपुर्जे और पार्ट्स बनाने वाले प्रभावित होंगे, जो इस सेक्टर की रीढ़ हैं।
 
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माइक्रो, स्माल और मीडियम एंटरप्राइजेज खुश नहीं

वढेरा के मुताबिक सरकार के 2023/2025 तक दो-तिपहिया वाहनों को बंद कर इलेक्ट्रिक वाहन शुरू करने से इस फैसले से न तो उद्योग जगत खुश है और न ही सप्लायर्स। इस फैसले से ऑटो इंडस्ट्री में आने वाले माइक्रो, स्माल और मीडियम एंटरप्राइजेज और कंपोनेंट सिस्टम को चोट पहुंचेगी।   
 
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