साल के अंत में ऑटोमोबाइल समुदाय को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के अनुसार, नवंबर 2025 के अंत तक डीलरों का स्टॉक घटकर लगभग 44 दिनों पर आ गया था, जो 2025 के अंत तक और कम होकर करीब 40 दिन रहने की संभावना है। डीलर बॉडी लंबे समय से मानती आई है कि 30–35 दिनों का इन्वेंट्री स्तर ऑटो रिटेल बिजनेस के लिए सबसे संतुलित होता है।
सितंबर 2025 में ऑटोमोबाइल पर जीएसटी दर 28% से घटाकर 18% किए जाने के बाद इंडस्ट्री में नई उम्मीद बनी। इसके साथ ही दिसंबर में ओईएम कही ओर से दिए गए उदार डिस्काउंट ऑफर्स ने बिक्री को और मजबूती दी।
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पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट की बात करें तो दिसंबर 2025 में अब तक 15% साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि इंडस्ट्री को एफवाई26 के अंत तक डबल डिजिट ग्रोथ की संभावना है। वहीं, अक्तूबर ऑटो इंडस्ट्री का गोल्डन महीना रहा। इसमें पैसेंजर व्हीकल (पीवी) 5.57 लाख यूनिट्स बिकी। दोपहिया वाहन 31.5 लाख यूनिट्स (52% YoY ) ग्रोथ रही। यानी कुल रिटेल बिक्री 40.24 लाख यूनिट्स रही। यह भारत के ऑटो सेक्टर का अब तक का सबसे बेहतरीन मासिक प्रदर्शन रहा।
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एफएडीए के सीईओ सहर्ष दमानी ने कहा कि एफवाई 26 की शुरुआत भले ही 2.5–3 प्रतिशत ग्रोथ के साथ हुई हो, लेकिन मार्च 2026 तक इंडस्ट्री 10% साल दर साल ग्रोथ के साथ खत्म होगी। यह साफ तौर पर जीएसटी दरों में बदलाव का असर है, जिसने पूरे सेक्टर में नया उत्साह भर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर की बिक्री सिर्फ पेंट-अप डिमांड नहीं, बल्कि जीएसटी 2.0 से आई वास्तविक मांग का नतीजा है।
डीलर बॉडी को उम्मीद है कि नए साल में वाहन कीमतों में बढ़ोतरी 1.5–2 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, ताकि बिक्री की यह रफ्तार बनी रहे। एफएडीए ने चेतावनी भी दी है कि सभी दोपहिया वाहनों में एबीएस (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) अनिवार्य होने से कीमतें 5,000–10,000 रुपये तक बढ़ सकती हैं। यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होना था, लेकिन इंडस्ट्री सूत्रों का मानना है कि भारी वॉल्यूम को देखते हुए इसे टाला जा सकता है।