Why not charge EV to 100 percent: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कम रनिंग कॉस्ट और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को देखते हुए लोग ईवी को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें नहीं पता कि हर बार गाड़ी को 100 प्रतिशत तक चार्ज करना नुकसानदायक साबित हो सकती है। आइए जानते हैं आखिर क्यों एक्सपर्ट्स 20-80% के गोल्डन रेशियो को बेस्ट मानते हैं।
आज की ईवी में आधुनिक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस ) लगाया जाता है। ये सिस्टम बैटरी सेल्स के वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग पैटर्न को मॉनिटर करता है। बीएमएस बैटरी को सुरक्षित दायरे में रखने की कोशिश करता है, लेकिन 100 प्रतिशत चार्ज पर लंबे समय तक रखने से केमिकल स्ट्रेस बढ़ सकता है। इसलिए कई निर्माता जैसे टेस्ला, एमजी मोटर और टाटा माेटर्स भी रोजाना के इस्तेमाल के लिए 80 से 90 प्रतिशत चार्ज लेवल रखने की सलाह देते हैं।
विज्ञापन
फुल चार्ज करने से क्या होता है?
बैटरी पर ज्यादा स्ट्रेस: लिथियम-आयन बैटरियां 100 प्रतिशत चार्ज पर हाई वोल्टेज स्टेट में रहती हैं। इससे बैटरी सेल्स की केमिकल संरचना पर दबाव बढ़ता है और समय के साथ क्षमता घटने लगती है।
हीट जनरेशन: चार्जिंग के अंतिम 10–15 प्रतिशत में बैटरी ज्यादा गर्म होती है। लगातार ऐसा करने से लॉन्ग-टर्म डिग्रेडेशन बढ़ सकता है।
चार्ज साइकल्स पर असर: हर बैटरी की सीमित चार्ज साइकल लाइफ होती है। 0–100 प्रतिशत फुल साइकल बार-बार करने से यह लाइफ जल्दी कम हो सकती है।
रोजाना और लंबी दूरी तय करने के लिए?
ये नियम सुनते ही लोग सोचते हैं कि लंबी दूरी में अगर बैटरी खत्म हो गई तो समस्या खड़ी हो सकती है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि अगर आप शहर के भीतर ड्राइव कर रहे हैं, तो 80% की लिमिट सेट कर दें। 100% चार्ज सिर्फ तभी करें जब आपको किसी लंबी हाईवे ट्रिप (Interstate Travel) पर जाना हो और आपको हर किलोमीटर की रेंज की जरूरत हो।
क्या हर ईवी में यह नियम समान है?
नहीं, क्योंकि कुछ ईवी निर्माता बैटरी के 100 प्रतिशत दिखने के बावजूद अंदरूनी तौर पर एक बफर रखते हैं, यानी असल क्षमता का थोड़ा हिस्सा रिजर्व में रहता है। इससे ओवरचार्जिंग का खतरा कम होता है। फिर भी, लगातार फुल चार्जिंग से बैटरी हेल्थ इंडिकेटर (SOH) तेजी से गिर सकता है। इसके अलावा, तेज डीजी फास्ट चार्जिंग का अत्यधिक उपयोग भी बैटरी डिग्रेडेशन बढ़ा सकता है।