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भारत में ही होंगे Euro NCAP स्टैंडर्ड वाले सेफ्टी टेस्ट: ARAI को मिली 'फार-साइड स्लेज टेस्ट' की बड़ी कामयाबी

Mon, 18 May 2026 06:10 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय वाहन सुरक्षा परीक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने आगामी 'यूरो एनसीएपी 2026' प्रोटोकॉल के तहत देश का पहला सफल 'फार-साइड स्लेज टेस्ट' आयोजित किया है। इस सफलता के बाद अब ऑटोमोबाइल निर्माताओं को एडवांस्ड क्रैश सुरक्षा टेस्टिंग के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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ARAI Vehicle safety testing programme - फोटो : ARAI
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विस्तार
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पुणे स्थित टेस्टिंग एजेंसी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने अपने वाहन सुरक्षा परीक्षण कार्यक्रम में एक और बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया है। एजेंसी ने आगामी 'यूरो एनसीएपी 2026' प्रोटोकॉल के तहत अपना पहला 'फार-साइड स्लेज टेस्ट' सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस विकास के साथ ही अब ARAI के पास भारत के भीतर ही एनसीएपी (NCAP) स्लेज मूल्यांकनों की पूरी श्रृंखला को संचालित करने की क्षमता आ गई है।

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इस नई क्षमता से ARAI की सेवाओं का कितना विस्तार होगा?

इस नई टेस्टिंग क्षमता के जुड़ने से सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन का दायरा काफी व्यापक हो गया है:

  • समीक्षा सेवाओं की सूची: इस नए परीक्षण के शामिल होने के बाद, ARAI अब अपनी यात्री सुरक्षा सत्यापन (ऑक्यूपेंट सेफ्टी वेलिडेशन) सेवाओं के हिस्से के रूप में नी मैपिंग (Knee mapping), व्हीकल-टू-व्हीकल कम्पैटिबिलिटी (VTC), व्हिपलैश (Whiplash), और फार-साइड स्लेज आकलनों को पूरा कर सकता है।

  • वैश्विक उपयोग: वैश्विक स्तर पर वाहन निर्माताओं द्वारा इन परीक्षणों का उपयोग यह जांचने के लिए किया जाता है कि क्रैश (दुर्घटना) की स्थितियों में रीस्ट्रेंट सिस्टम (सीटबेल्ट आदि) और केबिन सुरक्षा तकनीकें कैसा प्रदर्शन करती हैं।

'फार-साइड स्लेज टेस्ट' क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

वाहनों के भीतर बैठे यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह टेस्ट बेहद खास भूमिका निभाता है:

  • विपरीत दिशा की टक्कर का अध्ययन: फार-साइड इम्पैक्ट असेसमेंट (दूरस्थ-पक्ष प्रभाव आकलन) को विशेष रूप से उस स्थिति में यात्री के मूवमेंट (हलचल) का अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया है, जब साइड टक्कर यात्री के बैठने की विपरीत दिशा की तरफ से होती है।

  • तकनीक का मूल्यांकन: यह परीक्षण इंजीनियरों को ऐसी दुर्घटनाओं के दौरान चोटों को कम करने में एयरबैग, सीटबेल्ट और सीटिंग सिस्टम की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने में मदद करता है।

  • शुरुआती दौर में पहचान: यूरो एनसीएपी स्लेज परीक्षण नियंत्रित सिमुलेशन (कंट्रोल्ड सिमुलेशन) का उपयोग करके किए जाते हैं। जो वास्तविक दुनिया की टक्कर की स्थितियों को दोबारा री-क्रिएट (पुनर्निर्मित) करते हैं। वाहन विकास के दौरान ये मूल्यांकन इसलिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि ये निर्माताओं को पूर्ण पैमाने पर क्रैश टेस्टिंग शुरू होने से पहले ही इंजीनियरिंग प्रक्रिया के शुरुआती दौर में सुरक्षा कमियों की पहचान करने की अनुमति देते हैं।

"डिजाइन एंड वैलिडेट इन इंडिया" पहल को इससे क्या मदद मिलेगी?

यह उपलब्धि देश को आत्मनिर्भर बनाने की सरकारी नीति को मजबूती प्रदान करती है:

  • विदेशी निर्भरता में कमी: ARAI ने कहा कि यह नवीनतम उपलब्धि भारत सरकार की व्यापक "डिजाइन एंड वैलिडेट इन इंडिया" (भारत में डिजाइन और सत्यापन करें) पहल के अनुरूप है। संस्था ने रेखांकित किया कि देश में ही एडवांस्ड सुरक्षा सत्यापन सेवाओं की स्थानीय उपलब्धता से प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) और विकास कार्यों के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम हो सकती है।

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भारतीय वाहन निर्माताओं को इससे क्या फायदे होंगे?

कड़े होते अंतरराष्ट्रीय नियमों के बीच स्थानीय स्तर पर इस सुविधा का होना भारतीय कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा:

  • एक ही स्थान पर सुविधाएं: एजेंसी ने इस बात पर भी रौशनी डाला कि उसका टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंप्यूटर-एडेड इंजीनियरिंग (CAE) क्षमताओं द्वारा समर्थित है। जिससे निर्माता एक ही स्थान पर सिमुलेशन और फिजिकल वैलिडेशन (भौतिक सत्यापन) दोनों सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

  • समय और लागत की बचत: जैसे-जैसे वैश्विक सुरक्षा नियम सख्त हो रहे हैं, भारतीय ऑटोमोटिव कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मानकों को पूरा करने के लिए एडवांस्ड क्रैश सुरक्षा प्रणालियों में निवेश बढ़ा रही हैं। देश के भीतर यूरो एनसीएपी के अनुरूप मूल्यांकन करने में सक्षम सुविधाएं विकास की समयसीमा को छोटा करने, और निर्यात बाजारों को लक्षित करने वाले निर्माताओं के लिए परीक्षण लागत को कम करने में मददगार साबित होंगी।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए ARAI ने कहा: “हम ARAI की परीक्षण क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाने में उनके अटूट समर्थन और समर्पण के लिए सभी हितधारकों और टीम के सदस्यों के प्रति अपनी सच्ची सराहना व्यक्त करते हैं।”


भारत में ही 'फार-साइड स्लेज टेस्ट' की क्षमता हासिल हो जाना देश के ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल भारत में बनने वाली कारों की सुरक्षा वैश्विक स्तर की होगी। बल्कि देश के भीतर ही कम लागत में विश्व-स्तरीय टेस्टिंग की राह भी आसान हो जाएगी।

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