आजकल की मॉडर्न कारों में एंड्रॉइड ऑटो एक अनिवार्य फीचर बन चुका है। यह तकनीक आपके स्मार्टफोन और कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम को इस तरह जोड़ती है कि आपको कॉल करने या रास्ता देखने के लिए फोन को हाथ लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
गूगल की ओर से वर्षों पहले लॉन्च हुआ एंड्रॉइड ऑटो फीचर ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटकने से रोकता है। ये एंड्रॉइड 8.0 या उससे ऊपर के वर्जन पर चलने वाले स्मार्टफोन्स को कार की स्क्रीन से कनेक्ट करता है। इसके जरिए मैप्स, म्यूजिक, कॉल्स और मैसेज को वॉयस कमांड (Google Assistant) से कंट्रोल किया जा सकता है।
क्या है एंड्रॉइड ऑटो और यह कैसे काम करता है?
एंड्रॉइड ऑटो का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग को डिस्ट्रेक्शन-फ्री बनाना है। इसकी मदद से ड्राइवर का ध्यान सड़क पर रहता है और वह बिना फोन पकड़े अपनी जरूरत के सभी काम कर सकता है। यह कार की डैशबोर्ड स्क्रीन को एक सरल और बड़े आइकन वाले इंटरफेस में बदल देता है।
How to connect Android Auto in car: कैसे करें कनेक्ट?
अपनी कार में एंड्रॉइड ऑटो शुरू करना बेहद आसान है:
कनेक्शन माध्यम: आप इसे यूएसबी केबल, ब्लूटूथ या वायरलेस वाई-फाई के जरिए कनेक्ट कर सकते हैं।
इंटरफेस: कनेक्ट होते ही कार की डिस्प्ले पर फोन के जरूरी एप्स (मैप्स, स्पोटिफाई) दिखने लगेंगे।
कस्टमाइजेशन: आप सेटिंग्स में जाकर अपनी पसंद के एप्स को स्क्रीन पर अरेंज कर सकते हैं।
हे गूगल की ताकत
इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत वॉयस कमांड है। आपको बस हे गूगल बोलना है और आप किसी को भी कॉल कर सकते हैं, मैसेज टाइप करवा सकते हैं या अपना पसंदीदा गाना बजवा सकते हैं। इससे आपको स्क्रीन छूने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
इसके और फायदे क्या हैं?
स्मार्ट नेविगेशन: गूगल मैप्स के जरिए लाइव ट्रैफिक अपडेट और सटीक रास्ता मिलता है।
मैसेजिंग और कॉल्स: व्हाट्सएप या टेक्स्ट मैसेज को यह पढ़कर सुनाता है और आपकी आवाज से ही जवाब टाइप कर देता है।
एंटरटेनमेंट: सफर को मजेदार बनाने के लिए आप म्यूजिक और पॉडकास्ट एप्स का आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
किन-किन कारों में ये फीचर मौजूद है?
भारत में लगभग हर बड़ी कार कंपनी अब अपनी गाड़ियों में Android Auto का फीचर देने लगी है। बजट कारों से लेकर लग्जरी गाड़ियों तक, यह फीचर अब एक स्टैंडर्ड बन गया है। यहां कुछ प्रमुख गाड़ियों में आपको यह फीचर मिल जाएगा:
बजट और लोकप्रिय हैचबैक कारों की बात करें तो मारुति सुजुकी की स्विफ्ट (वीएक्सआई और ऊपर के मॉडल), बलेनो, ऑल्टो के10, एस-प्रेसो, सेलेरियो, वैगन आर (टॉप मॉडल) में मिलता है। टाटा मोटर्स की टियागो, अल्ट्रोज। ह्यूंदै की i20, ग्रैंड i10 Nios और रेनो क्विड में यह फीचर मिलता है।
कैसे पहचानें कि आपकी गाड़ी में यह है या नहीं?
टचस्क्रीन साइज: आमतौर पर जिन गाड़ियों में 7 इंच या उससे बड़ी टचस्क्रीन होती है, उनमें एंड्रॉइड ऑटो जरूर होता है।
स्मार्टफोन कनेक्टिविटी: कार के ब्रोशर में स्मार्टफोन कनेक्टिविटी या स्मार्टप्ले डॉक या स्टूडियो लिखा है, तो समझिये यह फीचर मौजूद है।
वायरलेस vs वायर्ड: बजट सेगमेंट की गाड़ियों में इसे इस्तेमाल करने के लिए यूएसबी केबल लगानी पड़ती है, जबकि नई प्रीमियम गाड़ियों में यह बिना तार के कनेक्ट हो जाता है।