लंबे वक्त तक चलेगा संकट
ये दिग्गज ऑटो कंपनियां अपनी मासिक औसत थोक बिक्री का दसवां हिस्सा भी बामुश्किल जुटा पाई हैं। वहीं विशेषज्ञों ने आर्थिक मंदी और ग्राहकों की उदासीनता के चलते इस संकट के लंबे वक्त तक चलने की चेतावनी दी है। हालांकि ज्यादातर वाहन निर्माताओं ने अपने प्लांट्स में कामकाज शुरू कर दिया है, लेकिन अभी भी उनका उत्पादन बेहद सीमित है क्योंकि सप्लायर्स, वेंडर्स, डीलर्स और फाइनेंसर्स अभी पूरी क्षमता के साथ नहीं जुट पाए हैं।
बैंकों ने कड़े किए मानदंड
बाजार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बैंकों के कड़े क्रेडिट मानदंडों और ग्राहक मूल्यांकन सख्त होने के कारण, बैंक अभी तक लोन की पेशकश नहीं कर रहे हैं। वहीं उनका कहना है कि थोक बिक्री के मुकाबले रिटेल के आंकड़े ज्यादा बढ़िया हैं, क्योंकि डीलर्स का स्टॉक धीरे-धीरे क्लीयर हो रहा है। उनका कहना है कि अप्रैल के मुकाबले मई थोड़ा तो बेहतर रहा है, अप्रैल को बिल्कुल जीरो गया था, लेकिन मई में रिटेल के आंकड़े थोक पर भारी पड़ेंगे।
सामान्य नहीं हुआ बाजार
ह्यूंदै मोटर इंडिया के सेल्स और मार्केटिंग के निदेशक तरुण गर्ग ने ईटी को बताया कि मई के संकेत सकारात्मक हैं। लेकिन सामान्य नहीं है, इसमें अभी वक्त लगेगा। उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें हर दिन 850 से 900 तक बुकिंग मिली हैं, जो लॉकडाउन से पहले 1500 प्रति दिन तक थीं। ह्यूंदै ने इस महीने 5,600 यूनिट बेची हैं।
आरटीओ नहीं कर रहे वाहनों का रजिस्ट्रेशन
वहीं टाटा मोटर्स से जुड़े एक डीलर का कहना है कि इस महीने भी रिटेल की बिक्री कुछ खास नहीं है। क्योंकि आरटीओ वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं कर रहे हैं और फाइनेंस कंपनियां लोन नहीं दे रही हैं। डीलर का कहना है कि अभी तक मार्च में बुक किए गए ऑडर्स की डिलीवरी होना बाकी है। वहीं हीरो मोटोकॉर्प से जुड़े एक डीलर का कहना है कि इस महीने उनकी बिक्री एक लाख यूनिट से भी कम हुई है, जो आमतौर पर साढ़े पांच यूनिट्स प्रति माह तक होती थी।