सितंबर-अक्तूबर 2025 से लागू जीएसटी कटौती के बाद पेट्रोल और डीजल वाहनों की कीमतें कम हो गईं। इससे आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बीच कीमत का अंतर घट गया। इसके परिणाम में दिसंबर तिमाही में आईसीई वाहनों की बिक्री में तेजी आई और ईवी की बाजार हिस्सेदारी पर दबाव बढ़ा।
क्या कहते हैं आंकड़ें?
वाहन पोर्टल VAHAN के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) का कुल रजिस्ट्रेशन 16 प्रतिशत बढ़कर 22.7 लाख यूनिट हो गया। यह संख्या 2024 में 19.5 लाख यूनिट थी। इसमें दो-पहिया, तीन-पहिया और एसयूवी कारें सभी शामिल हैं, जो कुल मांग को बताता है।
ये भी पढ़े:Auto Sales: 2025 में यात्री वाहन होलसेल ने बनाया रिकॉर्ड, 45.5 लाख यूनिट्स की बिक्री से ऑटो इंडस्ट्री को नई रफ्तार
दो-पहिया सेगमेंट में ईवी पैठ 2024 के 6% से बढ़कर जनवरी–सितंबर 2025 में 8.1% तक पहुंची थी। हालांकि जीएसटी कटौती के बाद दिसंबर तिमाही में गिरावट आई, जिससे पूरे साल की औसत पैठ 6.3% पर सिमट गई। फिर भी, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री 11 प्रतिशत बढ़कर 12.8 लाख यूनिट रही।
पैसेंजर व्हीकल ईवी में तेज ग्रोथ
हाइब्रिड को छोड़कर इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (पीवी) सेगमेंट में ईवी पैठ 2024 के 2.5% से बढ़कर 2025 में करीब 4% हो गई। इस दौरान बिक्री में 77% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल रजिस्ट्रेशन 1.8 लाख यूनिट तक पहुंच गया। ये ग्रोथ नए मॉडल लॉन्च और नए निर्माताओं की एंट्री से आई है।
तीन पहिया सेगमेंट की बात करें तो ये ईवी के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। ई-रिक्शा को छोडकर इलेक्ट्रिक की पैठ 2024 के 12 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 18 प्रतिशत हो गई। इस सेगमेंट में बिक्री 15 प्रतिशत से बढ़कर आठ लाख यूनिट पहुंची। जिसमें ई-रिक्शा का हिस्सा करीब 70 प्रतिशत रहा।
ईवी का एडवांटेज घटा
विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी कटौती ने पेट्रोल और डीजल वाहनों को ज्यादा किफायती बना दिया, जिससे ईवी का प्राइस एडवांटेज कम हुआ। इसका सबसे ज्यादा असर दो-पहिया और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में ईवी की पैठ पर पड़ा। इनका मानना है कि जीएसटी कटौती के बाद भले ही ईवी की बाजार हिस्सेदारी पर दबाव आया हो, लेकिन कुल ईवी बिक्री की रफ्तार बनी हुई है।