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फ्लेक्स फ्यूल: E20 के बाद सीधे E85 पेट्रोल क्यों ले आई सरकार? जानिए इसके पीछे की वजह और ब्राजील कनेक्शन

Tue, 09 Jun 2026 05:14 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

E85 Fuel India: भारत ने हाल ही में E20 पेट्रोल को देशभर में लागू किया था, लेकिन इसके बाद सरकार ने E22, E27 और E30 जैसे चरणबद्ध ईंधन विकल्पों को छोड़कर E85 (फ्लेक्स फ्यूल) पंप खोल दिया। लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर सरकार ने ये छलांग क्यों लगाई
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E20 के बाद सीधे E85 पेट्रोल लॉन्च करने की असली वजह - फोटो : एआई
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विस्तार
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हाल ही में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली में देश का पहला E85 (फ्लेक्स फ्यूल) पंप खोल दिया है। इंडियन ऑयल के इस पंप पर इस नए पेट्रोल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर है। अब आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है- सरकार ने तो E22, E27 और E30 फ्यूल लाने की बात कही थी, तो फिर E20 के बाद सीधा E85 पर छलांग क्यों लगाई गई? आइए इसे समझते हैं।

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क्या होता है फ्लेक्स फ्यूल (E85)?

फ्लेक्स फ्यूल असल में पेट्रोल और इथेनॉल (या मेथनॉल) का मिश्रण होता है।

  • E85 का मतलब: इसमें 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है।
  • इंजन (FFV): फ्लेक्स-फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों के इंजन खास तरीके से डिजाइन किए जाते हैं। ये इंजन E20 से लेकर E85, यहां तक कि E100 (100% इथेनॉल) पर भी बिना किसी परेशानी के चल सकते हैं।

 

सरकार का फ्यूल फ्लेक्स को लेकर क्या है लक्ष्य

सरकार का मुख्य लक्ष्य फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के माध्यम से पेट्रोल की खपत को कम करना और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक देशभर में ऐसे 5,000 विशेष फ्यूल स्टेशन स्थापित किए जाएं जो E85 उपलब्ध कराएं।


सरकार फ्लेक्स फ्यूल क्यों ला रही है?

विदेशी मुद्रा की बचत: भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन से अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

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किसानों को लाभ: एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनता है। इससे किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
सस्ता ईंधन: फ्लेक्स फ्यूल में उपयोग होने वाला एथेनॉल पेट्रोल से काफी सस्ता पड़ता है। ये सामान्य पेट्रोल के मुकाबले लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता पड़ता है।
पर्यावरण संरक्षण: फ्लेक्स फ्यूल एक ग्रीन फ्यूल है, जिससे पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है।


फ्लेक्स फ्यूल से जुड़ी अहम बातें और लक्ष्य

वर्तमान स्थिति: भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है।
नए वाहन और ईंधन: अब मारुति और हीरो जैसी कंपनियों ने भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां और मोटरसाइकिलें पेश की हैं जो 100% तक एथेनॉल (E100) या E85 पर चल सकती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देशभर में E85 जैसे उच्च एथेनॉल वाले फ्यूल उपलब्ध कराने के लिए वर्तमान में चुनिंदा 48 पंपों से शुरू करके, 2026 के अंत तक 500 और 2027 तक 5,000 पंपों का नेटवर्क बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है।


ब्राजील से मिला सबक

सरकार का सीधा E85 की तरफ जाने का फैसला ब्राजील के अनुभवों पर आधारित है। ब्राजील में साल 2003 से ही फ्लेक्स फ्यूल वाली गाड़ियां सफलतापूर्वक चल रही हैं। इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है:

  • चीनी की कमी और महंगाई: 70 के दशक में फ्यूल संकट से निपटने के लिए ब्राजील ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना शुरू किया और E25 फ्यूल लाया। लेकिन इथेनॉल की मांग इतनी बढ़ गई कि देश में खाने वाली चीनी का उत्पादन कम हो गया और चीनी भयंकर महंगी हो गई।
  • पुरानी गाड़ियों में खराबी: नई तरह का फ्यूल जब पुरानी गाड़ियों में डाला गया, तो उनके इंजनों में टूट-फूट और कई तरह की तकनीकी दिक्कतें आने लगीं।

भारत में भी 2023 से पहले की गाड़ियां E20 या उससे ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल के हिसाब से नहीं बनी हैं। सरकार को समझ आ गया कि E22 या E30 लाने से पुरानी गाड़ियों में खराबी आएगी। इसलिए सबसे अच्छा समाधान यही है कि सीधा फ्लेक्स फ्यूल और फ्लेक्स इंजन वाली गाड़ियां लाई जाएं, ताकि गाड़ी कोई भी फ्यूल डलवाए, इंजन को कोई नुकसान न हो।


क्या फ्लेक्स फ्यूल वाकई आपकी जेब का बोझ कम करेगा?

E20 फ्यूल आने के बाद भी देश में पेट्रोल 100 रुपये के पार है। लेकिन फ्लेक्स फ्यूल (E85) इसके मुकाबले लगभग 20 रुपये सस्ता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का एक अलग नजरिया भी है। इथेनॉल वाले फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज थोड़ा कम हो जाता है।

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर माइलेज कम मिल रहा है, तो ग्राहकों को असली फायदा तब होगा जब फ्लेक्स फ्यूल की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम से कम 30% सस्ती हो यानी करीब 70 रुपये प्रति लीटर के आसपास। ब्राजील में भी सामान्य पेट्रोल और इथेनॉल मिक्स पेट्रोल की कीमत में इतना अंतर है कि माइलेज कम मिलने के बावजूद ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त असर नहीं पड़ता।

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आगे की राह और सबसे बड़ी चुनौती

भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2027 के अंत तक देश भर में 5000 फ्लेक्स फ्यूल पंप लगाए जाएं। उम्मीद है कि भविष्य में सामान्य पेट्रोल और फ्लेक्स फ्यूल के दामों में 30% का अंतर देखने को मिलेगा। इस समय देश की सड़कों पर करोड़ों ऐसी गाड़ियां दौड़ रही हैं जो फ्लेक्स फ्यूल फ्रेंडली नहीं हैं।

इन पुरानी गाड़ियों को नई फ्लेक्स-फ्यूल कारों (FFVs) से पूरी तरह बदलनें में कई दशकों का समय लग सकता है। अब देखना यह होगा कि इस बीच सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां आम जनता के लिए क्या वैकल्पिक समाधान लेकर आती हैं।

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