हाल ही में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली में देश का पहला E85 (फ्लेक्स फ्यूल) पंप खोल दिया है। इंडियन ऑयल के इस पंप पर इस नए पेट्रोल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर है। अब आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है- सरकार ने तो E22, E27 और E30 फ्यूल लाने की बात कही थी, तो फिर E20 के बाद सीधा E85 पर छलांग क्यों लगाई गई? आइए इसे समझते हैं।
फ्लेक्स फ्यूल असल में पेट्रोल और इथेनॉल (या मेथनॉल) का मिश्रण होता है।
सरकार का मुख्य लक्ष्य फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के माध्यम से पेट्रोल की खपत को कम करना और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक देशभर में ऐसे 5,000 विशेष फ्यूल स्टेशन स्थापित किए जाएं जो E85 उपलब्ध कराएं।
विदेशी मुद्रा की बचत: भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन से अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
वर्तमान स्थिति: भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है।
नए वाहन और ईंधन: अब मारुति और हीरो जैसी कंपनियों ने भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां और मोटरसाइकिलें पेश की हैं जो 100% तक एथेनॉल (E100) या E85 पर चल सकती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देशभर में E85 जैसे उच्च एथेनॉल वाले फ्यूल उपलब्ध कराने के लिए वर्तमान में चुनिंदा 48 पंपों से शुरू करके, 2026 के अंत तक 500 और 2027 तक 5,000 पंपों का नेटवर्क बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है।
सरकार का सीधा E85 की तरफ जाने का फैसला ब्राजील के अनुभवों पर आधारित है। ब्राजील में साल 2003 से ही फ्लेक्स फ्यूल वाली गाड़ियां सफलतापूर्वक चल रही हैं। इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है:
भारत में भी 2023 से पहले की गाड़ियां E20 या उससे ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल के हिसाब से नहीं बनी हैं। सरकार को समझ आ गया कि E22 या E30 लाने से पुरानी गाड़ियों में खराबी आएगी। इसलिए सबसे अच्छा समाधान यही है कि सीधा फ्लेक्स फ्यूल और फ्लेक्स इंजन वाली गाड़ियां लाई जाएं, ताकि गाड़ी कोई भी फ्यूल डलवाए, इंजन को कोई नुकसान न हो।
E20 फ्यूल आने के बाद भी देश में पेट्रोल 100 रुपये के पार है। लेकिन फ्लेक्स फ्यूल (E85) इसके मुकाबले लगभग 20 रुपये सस्ता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का एक अलग नजरिया भी है। इथेनॉल वाले फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज थोड़ा कम हो जाता है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर माइलेज कम मिल रहा है, तो ग्राहकों को असली फायदा तब होगा जब फ्लेक्स फ्यूल की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम से कम 30% सस्ती हो यानी करीब 70 रुपये प्रति लीटर के आसपास। ब्राजील में भी सामान्य पेट्रोल और इथेनॉल मिक्स पेट्रोल की कीमत में इतना अंतर है कि माइलेज कम मिलने के बावजूद ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त असर नहीं पड़ता।
भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2027 के अंत तक देश भर में 5000 फ्लेक्स फ्यूल पंप लगाए जाएं। उम्मीद है कि भविष्य में सामान्य पेट्रोल और फ्लेक्स फ्यूल के दामों में 30% का अंतर देखने को मिलेगा। इस समय देश की सड़कों पर करोड़ों ऐसी गाड़ियां दौड़ रही हैं जो फ्लेक्स फ्यूल फ्रेंडली नहीं हैं।
इन पुरानी गाड़ियों को नई फ्लेक्स-फ्यूल कारों (FFVs) से पूरी तरह बदलनें में कई दशकों का समय लग सकता है। अब देखना यह होगा कि इस बीच सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां आम जनता के लिए क्या वैकल्पिक समाधान लेकर आती हैं।