फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत में जल्दी आ रही हैं छोटी और सस्ती हाइब्रिड कारें: खत्म होगा ईवी की रेंज का डर! जानें लिस्ट में कौन-कौन?

Sat, 10 Oct 2026 12:45 AM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में छोटी कारों का बाजार आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव का गवाह बन सकता है। वाहन निर्माता कंपनियां किफायती हाइब्रिड तकनीक को छोटी कारों और चार मीटर से कम लंबाई वाली कार में लाने की तैयारी कर सकती हैं। आइए जानते हैं कि क्या भारत में छोटी हाइब्रिड कारों से ईवी की रेंज एंग्जायटी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी?
विज्ञापन
Affordable Hybrid Cars In India - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। अगले 18 से 24 महीनों के भीतर देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियां किफायती हाइब्रिड तकनीक को छोटी कारों और सब-4 मीटर एसयूवी सेगमेंट में पेश करने की तैयारी कर रही हैं।
  • बीच का रास्ता: यह नई तकनीक उन ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होगी जो चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता या लंबी दूरी के सफर की झंझट (रेंज एंग्जायटी) के बिना शानदार माइलेज चाहते हैं।
  • प्रमुख कंपनियां: मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, टोयोटा और रेनो जैसी दिग्गज कंपनियां 4 मीटर से छोटी कारों में हाइब्रिड पावरट्रेन लाने पर काम कर रही हैं।

 

मारुति सुजुकी और टोयोटा छोटी कारों में हाइब्रिड तकनीक कब तक लाएंगे?

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी एक नई और किफायती हाइब्रिड प्रणाली विकसित कर रही है, जिसे भविष्य में अपने कॉम्पैक्ट मॉडल लाइनअप में इस्तेमाल किया जाएगा:
  • मारुति सुजुकी के संभावित मॉडल: इस सस्ती हाइब्रिड तकनीक को फ्रोंक्स (Fronx), बलेनो (Baleno), स्विफ्ट (Swift) और ब्रेजा (Brezza) जैसी लोकप्रिय गाड़ियों में पेश किया जा सकता है। इस तकनीक से लैस पहला मारुति मॉडल 2027 की शुरुआत में दस्तक दे सकता है।
  • Toyota Urban Cruiser Taisor: मारुति और टोयोटा की वैश्विक साझेदारी के तहत, फ्रोंक्स हाइब्रिड के आने के बाद टोयोटा अपनी अर्बन क्रूजर टैसर (Taisor) के हाइब्रिड वेरिएंट को भी बाजार में उतार सकती है।

 

ह्यूंदै और रेनो की छोटी हाइब्रिड कारों को लेकर क्या योजनाएं हैं?

मारुति के अलावा अन्य वैश्विक कंपनियां भी इस रेस में पीछे नहीं हैं और भारतीय बाजार के हिसाब से खास हाइब्रिड मॉडल तैयार कर रही हैं:
  • Hyundai की कॉम्पैक्ट हाइब्रिड: ह्यूंदै भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कॉम्पैक्ट हाइब्रिड कार पर काम कर रही है, जिसे 2027 के मध्य तक पेश किए जाने की संभावना है। इसका मुख्य फोकस कॉम्पैक्ट साइज में जबर्दस्त फ्यूल एफिशिएंसी देना होगा।
  • Renault की अर्बन हाइब्रिड एसयूवी: रेो अपने 'Bridger' कॉन्सेप्ट पर आधारित एक नई सब-4 मीटर अर्बन एसयूवी तैयार कर रही है। हाइब्रिड तकनीक से लैस यह कार 2027 के अंत तक डेब्यू कर सकती है।

 

मौजूदा हाइब्रिड कारें महंगी क्यों हैं और नए नियमों से कीमतें कैसे कम होंगी?

फिलहाल भारतीय बाजार में उपलब्ध स्ट्रांग-हाइब्रिड कारें (जैसे मारुति विक्टोरिस, ग्रैंड विटारा, होंडा सिटी और टोयोटा हाइराइडर) प्रीमियम सेगमेंट में आती हैं और पारंपरिक पेट्रोल कारों की तुलना में काफी महंगी हैं। इसके दो मुख्य कारण हैं:
  1. 4-मीटर से अधिक लंबाई: अधिकांश वर्तमान हाइब्रिड कारें 4 मीटर से बड़ी हैं, जिससे उन पर उच्च टैक्स स्लैब लागू होता है।
  2. टैक्स स्ट्रक्चर में राहत: सितंबर 2025 में संशोधित जीएसटी ढांचे के तहत चुनिंदा छोटी हाइब्रिड कारों पर जीएसटी दर घटाकर 18% कर दी गई है। इस कर कटौती से आने वाले समय में छोटी हाइब्रिड कारों को काफी किफायती कीमतों पर लॉन्च करना संभव हो सकेगा।

 

भारतीय ग्राहकों के लिए हाइब्रिड पावरट्रेन पेट्रोल और ईवी से बेहतर क्यों है?

हाइब्रिड तकनीक में इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का तालमेल होता है, जो इसे भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाता है:
  • नो-चार्जिंग झंझट: प्योर इलेक्ट्रिक कार (EV) की तरह हाइब्रिड कार को बाहरी चार्जिंग स्टेशन पर प्लग करने की जरूरत नहीं होती। बैटरी डिस्चार्ज होने पर पेट्रोल इंजन कार को पावर देता रहता है।
  • शहर में बेहतरीन माइलेज: ट्रैफिक में रुक-रुक कर चलने के दौरान कार इलेक्ट्रिक मोटर पर चलती है, जिससे ईंधन की भारी बचत होती है।
  • लंबी दूरी में सहूलियत: हाईवे पर पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर मिलकर काम करते हैं, जिससे रेंज खत्म होने का डर नहीं रहता।

 

क्या CAFE 3 उत्सर्जन नियम हाइब्रिड कारों को अपनाने में तेजी लाएंगे?

भारत में हाइब्रिड तकनीक को बढ़ावा देने में CAFE (कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता) नियमों का तीसरा चरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा:
  • अप्रैल 2027 से लागू: CAFE का तीसरा चरण 1 अप्रैल 2027 से लागू होने जा रहा है।
  • फ्लीट एफिशिएंसी का दबाव: इस नियम के तहत कार निर्माताओं को अपनी पूरी गाड़ियों के बेड़े के औसतन कार्बन उत्सर्जन को कम करना होगा।
  • इस कड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऑटो कंपनियों के लिए हाइब्रिड पावरट्रेन सबसे व्यावहारिक और कारगर रास्ता साबित होगा। 

 

भविष्य में पेट्रोल, हाइब्रिड और ईवी के बीच मुकाबला कैसा रहेगा?

आने वाले वर्षों में भारतीय ग्राहकों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं होगी। जहां पेट्रोल कारें भरोसेमंद हैं और ईवी जीरो-एमिशन का विकल्प देती हैं, वहीं हाइब्रिड कारें दोनों के बेहतरीन फायदों को एक साथ लाती हैं। यदि कंपनियां बिना ज्यादा कीमत बढ़ाए छोटी कारों में हाइब्रिड तकनीक लाने में सफल रहती हैं। तो अगले कुछ वर्षों में भारतीय सड़कों पर हाइब्रिड गाड़ियां सबसे आम नजारा बन सकती हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें