घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना
सरकार केवल ईवी बिक्री ही नहीं बल्कि देश में घरेलू उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। इसी दिशा में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (PLI) शुरू की गई है। यह योजना सितंबर 2021 में मंजूर हुई थी और इसका बजट लगभग 25,938 करोड़ रुपये है।इसका उद्देश्य विकासशील ऑटोमोटिव तकनीकों के उत्पादन को बढ़ाना और उद्योग में नए निवेश को आकर्षित करना है।
बैटरी निर्माण के लिए बड़ा निवेश
ईवी उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बैटरी मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एडवांस केमेस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए पीएलआई योजना शुरू की है। इसके लिए करीब 18,100 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। जिसका लक्ष्य भारत में 50 GWh बैटरी निर्माण क्षमता स्थापित करना है। माना जा रहा है कि इससे बैटरी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
PM E-DRIVE योजना से मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने सितंबर 2024 में पीएम ई-ड्राइव भी शुरू की। इस योजना के लिए कुल बजट लगभग 10,900 करोड़ है और यह चार वर्षों तक लागू रहेगी। इसके तहत
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, ई-एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक ट्रक और इलेक्ट्रिक बसों का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन परीक्षण सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में नए ऑटो-रिक्शा परमिट पर लगी रोक: क्या है सरकार के इस बड़े फैसले की 4 अहम वजहें, समझिए पूरी मामला
रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण को भी बढ़ावा
इतना ही नहीं ईवी मोटर में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने नई योजना शुरू की है। इसके लिए भी करोड़ों का बजट आवंटित किया गया। इसका लक्ष्य हर साल करीब छह हजार मीट्रिक ट्रन उत्पादन क्षमता बढ़ाना है। इससे ईवी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए सुरक्षा तंत्र
सरकार ने पीएम ई-बस सेवा पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म स्कीम भी शुरू की है। जिसका बजट करीब 3,435 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। देशभर में 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती को समर्थन देना ही इसका लक्ष्य है। यह योजना बस ऑपरेटरों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
भारत को ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिश
सरकार विदेशी कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रिक कार उत्पादन के लिए आकर्षित करने की योजना भी चला रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को कम से कम 4,150 करोड़ रुपये निवेश करना होगा। फिर तीसरे साल तक 25% लोकल वैल्यू एडिशन और पांचवें साल तक 50% घरेलू उत्पादन होगा। इससे भारत में ईवी उद्योग के लिए बड़ा इकोसिस्टम तैयार होने की उम्मीद है।