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कार इंश्योरेंस: इन पांच वजहों से रिजेक्ट हो सकता है वाहन का बीमा दावा, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?

Thu, 24 Sep 2026 01:28 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गाड़ी का एक्सीडेंट होना किसी भी कार मालिक के लिए बड़ा झटका होता है, लेकिन जब बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर देती है, तो मुसीबत और बढ़ जाती है। अधिकतर लोगों को लगता है कि कंपनियां जानबूझकर क्लेम रिजेक्ट करती हैं, लेकिन असलियत में इसकी वजह पॉलिसीधारक की खुद की गलतियां या लापरवाही हो सकती है। आइए जानते हैं किन पांच प्रमुख कारणों से आपका क्लेम खारिज हो सकता है और रिजेक्ट होने पर क्या करें।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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गाड़ी का एक्सीडेंट के बाद इंश्योरेंस क्लेम फाइल करने पर अगर बीमा कंपनी उसे रिजेक्ट कर देती है, तो परेशानी और बढ़ जाती है। अक्सर लोग मान लेते हैं कि बीमा कंपनियां पैसा बचाने के लिए क्लेम खारिज करती हैं। हालांकि, कई मामलों में क्लेम रिजेक्ट होने की वजह पॉलिसीधारक की गलती या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हो सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में कार का इंश्योरेंस क्लेम खारिज हो सकता है।

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शराब पीकर गाड़ी चलाना

  • अगर एक्सीडेंट के समय ड्राइवर नशे में पाया जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। शराब पीकर गाड़ी चलाना भारत में कानूनन अपराध है और मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों के तहत ऐसे मामलों में क्लेम पर असर पड़ सकता है।
  • गाड़ी को कितना भी नुकसान क्यों न हुआ हो, नशे में ड्राइविंग की स्थिति में पॉलिसीधारक को क्लेम मिलने में परेशानी हो सकती है।


ड्राइविंग लाइसेंस में समस्या
इसके अलावा अगर एक्सीडेंट के समय ड्राइवर के पास वैध और सही कैटेगरी का ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति के पास सिर्फ टू-व्हीलर चलाने का लाइसेंस है और वह कार चलाते हुए दुर्घटना का शिकार हो जाता है, तो इंश्योरेंस क्लेम खारिज हो सकता है। इसी तरह एक्सपायर्ड ड्राइविंग लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाने पर भी क्लेम को लेकर समस्या हो सकती है।

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एक्सीडेंट की जानकारी देने में देरी
हर इंश्योरेंस पॉलिसी में एक्सीडेंट या नुकसान की सूचना देने से जुड़ी शर्तें होती हैं। अगर पॉलिसीधारक तय समय के बाद बीमा कंपनी को हादसे की जानकारी देता है, तो इसे लेट इंटिमेशन माना जा सकता है और क्लेम खारिज होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए एक्सीडेंट होने के बाद जितनी जल्दी संभव हो, बीमा कंपनी को इसकी सूचना देना जरूरी है।

निजी कार का कमर्शियल इस्तेमाल
अगर किसी कार का इंश्योरेंस निजी इस्तेमाल के लिए कराया गया है, लेकिन उसे कैब या डिलीवरी जैसे कमर्शियल काम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो दुर्घटना की स्थिति में क्लेम खारिज हो सकता है।
कमर्शियल इस्तेमाल के लिए अलग तरह की पॉलिसी और प्रीमियम होता है। ऐसे में पर्सनल कार इंश्योरेंस के तहत कमर्शियल इस्तेमाल से हुए नुकसान का क्लेम कवर नहीं हो सकता।

पॉलिसी एक्सपायर होने पर नहीं मिलेगा कवर

  • अगर एक्सीडेंट के समय कार की इंश्योरेंस पॉलिसी एक्सपायर हो चुकी है और उसका रिन्यूअल नहीं कराया गया है, तो नुकसान का क्लेम मिलना मुश्किल हो सकता है।
  • इसके अलावा कार में बिना बीमा कंपनी को बताए बड़े बदलाव करना भी क्लेम के दौरान समस्या पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए अलग इंजन किट लगाना या कार की बॉडी में बड़ा बदलाव करना वाहन के मूल स्वरूप और जोखिम को बदल सकता है।


क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आपका इंश्योरेंस क्लेम गलत तरीके से खारिज किया गया है, तो सबसे पहले बीमा कंपनी के आंतरिक शिकायत निवारण सेल में शिकायत या अपील की जा सकती है। इसके अलावा शिकायत का समाधान नहीं होने पर आईआरडीएआई (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के संबंधित शिकायत निवारण माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसलिए कार का इंश्योरेंस कराते समय सिर्फ प्रीमियम पर ध्यान देने के बजाय पॉलिसी की शर्तों को भी अच्छी तरह पढ़ना जरूरी है। साथ ही पॉलिसी समय पर रिन्यू कराएं, वैध ड्राइविंग लाइसेंस रखें और कार का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए करें जिसके लिए उसका बीमा कराया गया है।

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