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Car Export: खाड़ी देशों को भेजी गई करीब 2,000 ह्यूंदै कारों के वापस आने की संभावना, पश्चिम एशिया संघर्ष का असर

Tue, 10 Mar 2026 01:54 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया में युद्ध के थमने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है, इसलिए भारत से खाड़ी देशों को निर्यात की गई लगभग 2,000 ह्यूंदै कारों का कंसाइनमेंट वापस चेन्नई पोर्ट पर भेजा जा सकता है।
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Automobile Industry - फोटो : PTI
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के निर्यात कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत से खाड़ी देशों के लिए भेजी गई करीब 2,000 Hyundai (ह्यूंदै) कारों की खेप वापस भारत लौट सकती है।
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ये वाहन भारत से भेजे जाने के बाद श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के जरिए आगे पश्चिम एशिया भेजे जाने वाले थे। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

 

कारों की खेप वापस क्यों लाई जा सकती है?
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर (रेड सी) मार्गों से जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इसी वजह से कुछ शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट और कार्गो मूवमेंट पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है।

इस स्थिति के चलते खाड़ी देशों के लिए भेजी गई करीब 2,000 ह्यूंदै कारों को वापस चेन्नई बंदरगाह लाया जा सकता है।

 

क्या कंटेनर ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ है?
इस संकट का असर कंटेनर ट्रैफिक पर भी पड़ा है। बंदरगाह सूत्रों के अनुसार लगभग 4,000 कंटेनर खाड़ी मार्ग से वापस मोड़े गए हैं।

इनमें से करीब 1,800 कंटेनर चेन्नई से भेजे गए थे। इससे निर्यात से जुड़े कारोबार पर दबाव बढ़ गया है।

क्या अन्य भारतीय बंदरगाहों पर भी असर पड़ा है?
संघर्ष शुरू होने के बाद तमिलनाडु के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है।

खासतौर पर वीओ चिंदम्बरनार (तूतीकोरिन) पर इसका बड़ा असर देखने को मिला है। यहां से कपड़े, होम टेक्सटाइल, खाद्य उत्पाद और अन्य सामान सीधे खाड़ी देशों में भेजे जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार एक जहाज, जिसमें लगभग 250 कंटेनर लदे थे, समुद्र में फंस गया। और बाद में उसने कंटेनरों को नावा शेवा बंदरगाह (मुंबई) पर उतार दिया।

 

निर्यातकों को कितना नुकसान हो सकता है?
निर्यातकों का कहना है कि कई कंटेनर अभी भी कंटेनर फ्रेट स्टेशनों, गोदामों और उत्पादन इकाइयों में फंसे हुए हैं।

विशेष रूप से कपड़ा और परिधान उद्योग को नुकसान होने की आशंका है। क्योंकि इनकी खेप रमजान से पहले पश्चिम एशियाई बाजारों में पहुंचाने की योजना थी।

 

बंदरगाह प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
स्थिति को देखते हुए बंदरगाह प्रशासन ने अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था शुरू कर दी है।

तूतीकोरिन बंदरगाह के बाहर लगभग 19,000 वर्ग मीटर जमीन अस्थायी रूप से कार्गो रखने के लिए चिन्हित की गई है।

वहीं चेन्नई पोर्ट ने भी करीब 20,000 वर्ग मीटर यार्ड स्पेस उपलब्ध कराया है। ताकि जरूरत पड़ने पर कार्गो वहां रखा जा सके।

 
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क्या वैकल्पिक समुद्री मार्ग तलाशे जा रहे हैं?
अधिकारियों के अनुसार अब ऐसे वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार किया जा रहा है जो होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मार्गों से बच सकें।

इसी बीच शिपिंग कंपनी Maersk (मार्सक) ने खाड़ी देशों के लिए कार्गो बुकिंग अस्थायी रूप से रोक दी है। और फिलहाल भोजन और दवाओं जैसी जरूरी आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर भारत के निर्यात और समुद्री व्यापार पर और अधिक गहरा हो सकता है। 

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