जुर्माने से राहत नहीं मिलने पर खाई कसम
इन वाहन चालकों में सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है जो किसी ने किसी आवश्यक कार्यों से ही बाहर निकल रहे हैं। बता दें कि दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान सरकारी ड्यूटी या जरूरी वस्तुओं की सप्लाई के काम में लगी अनेक टीमों को पास जारी किए गए हैं। लेकिन यह रोड खाली होने पर तेजी से वाहन चला रहे हैं साथ ही रेड लाइट नियमों का भी पालन नहीं कर रहे हैं। एक हेल्थकेयर वर्कर ने ट्विटर पर दिल्ली पुलिस से सवाल पूछा है कि उसने अपने कार्यस्थल पर पहुंचने के लिए तेज गति से बाइक चलाई है क्या उसे जुर्माने से कुछ राहत मिल सकती है।
इस पर पुलिस ने उसे लॉकडाउन के बाद ट्रैफिक मुख्यालय आने को कहा है। उसने कहा कि अब मैं कोई अन्य जोखिम नहीं उठाना चाहता हूं क्योंकि यह मेरी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा है। वहीं पुलिस के विशेष आयुक्त (दिल्ली ट्रैफिक पुलिस) ताज हसन ने कहा कि कानून किसी को भी छूट की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को नियमों का पालन करना चाहिए।
महिला ने कहा मुझे अस्पताल जल्दी पहुंचना है
वहीं ट्विटर पर एक अन्य व्यक्ति ने एक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन पोस्ट करते हुए कहा कि वह एक अस्वस्थ व्यक्ति को अस्पताल लेकर जा रहा था, लेकिन उसे 24 मिनट की अवधि के भीतर दो बार तेज गति के कराण चालान का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा दिल्ली से गुड़गांव जाने वाली एक हेल्थकेयर महिला ने चालन के विरोध में लिखा कि मेरी एकमात्र प्रतिबद्धता अस्पताल तक जल्द से जल्द पहुंचने की है। बता दें कि लॉकडाउन के बावजूद भी भारत में एक्सीडेंट से 115 से अधिक लोगों की जानें चली गई हैं। जिसमें से 10 फीसदी दुर्घटना के मामले दिल्ली के हैं। इससे पता चलता है कि हमारी सड़के कितनी खतरनाक हैं। इसलिए एक दूसरे को सुरक्षित रखने के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है। ताज हसन ने कहा कि आप कैमरों की निगरानी में हैं लेकिन कुछ लोग आदत के कराण तेज गाड़ी चलाते हैं। ऐसे लोगों को जुर्माना भरना ही होगा।
लॉकडाउन में तेज गति से कर रहे हैं ड्राइव
विशेष आयुक्त हसन ने कहा कि 35 दिनों के लॉकडाउन में इन कैमरों ने कुल 5,07,563 ओवर स्पीडिंग के मामले देखे हैं। यानी लगभग हर दिन 14,500 उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। जबकि लॉकडाउन से पहले के 10 दिनों में 5,11,577 तेज गति उल्लंघन के मामले थे, हर दिन करीब 51,157 मामले सामने आए। इस औसत के हिसाब से 35 लोग एक मिनट की दर से जुर्माना भरते हैं। हसन ने कहा कि सड़कों पर जाम नहीं है लेकिन फिर भी कुछ लोग खाली सड़कों का उपयोग तेज गति के लिए कर रहे हैं।
कैमरा देखते ही स्पीड धीमी कर लेते हैं लोग
हसन ने कहा कि सड़कें खाली होने के बावजूद शहर में घातक दुर्घटनाएं हुई हैं। लॉकडाउन के दौरान 13 घातक दुर्घटनाएं हुई हैं। यह सभी तेज गति के कारण हुई हैं। मारे गए लोगों में एक एमसीडी के डॉक्टर भी शामिल हैं। वहीं पिछले साल औसतन हर दिन करीब चार घातक दुर्घटनाएं होती थीं। हसन ने कहा कि सड़कों पर 100 से ज्यादा स्पीड डिटेक्टर कैमरे लगे हैं। साथ ही, 34 बड़े इंटरसेक्शन ऐसे हैं, जहां अन्य कैमरे लगे हैं। प्रत्येक जंक्शन में कुल चार कैमरे होते हैं। उन्होंने कहा कि कुल 236 स्पीड डिटेक्शन कैमरे हमारा काम करते हैं। वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो कैमरे के पास गति धीमी कर देते हैं लेकिन बाद में तुरंत गति बढ़ा देते हैं। ऐसे लोगों से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कुछ स्थानों पर मैनुअल कैमरे लगाने भी फैसला किया है।