"7 चक्र हीलिंग वर्कशॉप" – अपने भीतर छिपी अनंत शक्ति को जानें आज ही रजिस्ट्रेशन करें- 7 Chakra Healing Certificate Course
मूलाधार चक्र
आपका मूलाधार चक्र आपके शरीर की जड़ या नींव माना जाता है। मूलाधार या मूल चक्र प्रवृत्ति, सुरक्षा, अस्तित्व और मानव की मौलिक क्षमता से संबंधित है। यह जनेंन्द्रिय और अधिवृक्क मज्जा से जुड़ा होता है। मूलाधार का प्रतीक लाल रंग और चार पंखुडिय़ों वाला कमल है। इसका मुख्य विषय कामवासना, लालसा और सनक में निहित है। शारीरिक रूप से मूलाधार काम-वासना को, मानसिक रूप से स्थायित्व को, भावनात्मक रूप से इंद्रिय सुख को और आध्यात्मिक रूप से सुरक्षा की भावना को नियंत्रित करता है। आप इस चक्र को प्राणायाम और बुनियादी योग मुद्राओं के माध्यम से संतुलित कर सकते हैं जैसे: ताड़ासन, वृक्षासन, शवासन।
स्वाधिष्ठान च्रक
स्वाधिष्ठान चक्र त्रिकास्थि यानी कमर के पीछे की तिकोनी हड्डी में अवस्थित होता है और अंडकोष या अंडाशय के परस्पर के मेल से विभिन्न तरह का यौन अंत:स्राव उत्पन्न करता है जो प्रजनन चक्र से जुड़ा होता है। स्वाधिष्ठान को आमतौर पर मूत्र तंत्र और अधिवृक्क से संबंधित भी माना जाता है। त्रिक चक्र का प्रतीक छह पंखुडिय़ों और उससे परस्पर जुड़ा हुआ नारंगी रंग का एक कमल है। स्वाधिष्ठान का मुख्य विषय संबंध, हिंसा, व्यसनों, मौलिक भावनात्मक आवश्यकताएं और सुख है। शारीरिक रूप से स्वाधिष्ठान प्रजनन, मानसिक रूप से रचनात्मकता, भावनात्मक रूप से खुशी और आध्यात्मिक रूप से उत्सुकता को नियंत्रित करता है।
मणिपुर चक्र
मणिपुर चक्र आपके ऊपरी पेट और छाती की हड्डी के बीच में स्थित है। आपके जिगर, पित्ताशय, पेट, तिल्ली और अग्न्याशय से जुड़ा हुआ, यह तीसरा चक्र आपकी व्यक्तिगत शक्ति या आपकी सहज प्रवृत्ति का स्रोत माना जाता है। आपका करियर, क्षमताएं और आत्म-सम्मान इस चक्र से प्रभावित होते हैं। शारीरिक रूप से, आपका मणिपुर चक्र आपके पेट से जुड़ा होता है और आपके चयापचय और पाचन तंत्र से संबंधित हर चीज को नियंत्रित करता है। जब यह अवरुद्ध हो जाता है, तो आपको पेट के अल्सर, अग्नाशयशोथ , पित्ताशय विकार, मधुमेह और अन्य पाचन विकार हो सकते हैं।
अनाहत चक्र
आपका चौथा चक्र, या अनाहत आपकी छाती में, हृदय क्षेत्र के पास स्थित है। यह चक्र दूसरों के लिए प्यार, रोमांस और सहानुभूति की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। अवरुद्ध हृदय चक्र आपको हृदय संबंधी बीमारियों, तंत्रिका टूटने, स्तन कैंसर, रीढ़ की हड्डी का पार्श्व वक्र, उच्च रक्तचाप , नींद संबंधी विकार और बहुत कुछ के लिए अधिक प्रवण बना सकता है।
विशुद्धि चक्र
यह चक्र गलग्रंथि, जो गले में होता है, के समानांतर है और थायरॉयड हारमोन उत्पन्न करता है, जिससे विकास और परिपक्वता आती है। इसका प्रतीक सोलह पंखुडिय़ों वाला कमल है। विशुद्ध की पहचान हल्के या पीलापन लिये हुए नीले या फिरोजी रंग है। यह आत्माभिव्यक्ति और संप्रेषण जैसे विषयों, जैसा कि ऊपर चर्चा की गई है, को नियंत्रित करता है।
आज्ञा चक्र
आज्ञा चक्र दोनों भौहों के मध्य स्थित होता है। आज्ञा चक्र का प्रतीक दो पंखुडिय़ों वाला कमल है और यह सफेद, नीले या गहरे नीले रंग से मेल खाता है। आज्ञा का मुख्य विषय उच्च और निम्न अहम को संतुलित करना और अंतरस्थ मार्गदर्शन पर विश्वास करना है। यदि यह चक्र अवरुद्ध या असंतुलित है, तो आपको मोतियाबिंद , माइग्रेन या सिरदर्द, चक्कर आना, डिस्लेक्सिया और यहां तक कि संक्रामक रोगों जैसी शारीरिक स्थितियों का अनुभव हो सकता है।
सहस्रार चक्र
सहस्रार को आमतौर पर शुद्ध चेतना का चक्र माना जाता है। यह मस्तक के ठीक बीच में ऊपर की ओर स्थित होता है। इसका प्रतीक कमल की एक हजार पंखुडिय़ां हैं और यह सिर के शीर्ष पर अवस्थित होता है। सहस्रार का आतंरिक स्वरूप कर्म के निर्मोचन से, दैहिक क्रिया ध्यान से, मानसिक क्रिया सार्वभौमिक चेतना और एकता से और भावनात्मक क्रिया अस्तित्व से जुड़ा होता है। जब आपका सहस्रार चक्र अवरुद्ध या असंतुलित होता है, तो आपको माइग्रेन, मिर्गी (दौरा विकार) और आपकी दाहिनी आंख से संबंधित परेशानियों का अनुभव हो सकता है।
7 Chakra Healing Certificate Course
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।