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Vastu Tips For Puja Ghar: घर में पूजा का स्थान कैसा होना चाहिए ? जानिए दिशा और देवताओं का वास्तु के विधान

Tue, 03 Feb 2026 05:08 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

Vastu Tips For Puja Ghar: वास्तु टिस्स के अनुसार, घर पर बने पूजा के स्थान का विशेष महत्व होता है। घर के इस कोने से सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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पूजा घर के नियम - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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आस्था और विश्वास के साथ जब हम अपने घर में ईश्वर को स्थान देते हैं, तो केवल पूजा ही नहीं करते बल्कि परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना भी करते हैं। घर में देवी-देवताओं की कृपा बनी रहे और पूजा-पाठ का पूर्ण फल प्राप्त हो, इसके लिए आवश्यक है कि पूजा घर का निर्माण और उपयोग वास्तु नियमों के अनुरूप किया जाए। गलत दिशा में या अनुचित स्थान पर की गई पूजा लाभ देने के स्थान पर मानसिक अशांति और बाधाओं का कारण बन सकती है।
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1. पूजा घर के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशा
मानसिक स्पष्टता, शुद्धता और प्रज्ञा की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को पूजा के लिए आदर्श माना गया है। यह कोण पूर्व और उत्तर दिशा के शुभ प्रभावों से युक्त होता है। वास्तु के अनुसार घर के इसी क्षेत्र में सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत-प्रतिशत रहता है, जिससे साधक को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

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2. पूजा करते समय मुख किस दिशा में रखें
सामान्य तौर पर पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। वास्तु ग्रंथों में बताया गया है कि
  • धन प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा की ओर मुख करके की गई पूजा
  • ज्ञान और आत्मिक विकास के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके की गई पूजा
  • अत्यंत शुभ और चमत्कारिक फल प्रदान करती है।

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3. दिशाओं के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा
वास्तु के अनुसार प्रत्येक दिशा का एक  देवता होता है। इसलिए उस दिशा विशेष में उसी देवता की पूजा करना अधिक फलदायी माना गया है
  • दक्षिण दिशा में देवी मां और हनुमान जी की पूजा
  • उत्तर दिशा में गणेश जी, लक्ष्मी जी एवं कुबेर की आराधना
  • उत्तर-पूर्व दिशा में शिव परिवार एवं राधा-कृष्ण की उपासना
  • पूर्व दिशा में श्रीराम दरबार, भगवान विष्णु एवं सूर्य देव की पूजा
  • पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम (शिक्षा की दिशा) में माँ सरस्वती की पूजा
  • पश्चिम दिशा में गुरु, महावीर स्वामी, भगवान बुद्ध एवं ईसा मसीह की आराधना
  • दक्षिण-पश्चिम (संबंधों की दिशा) में पूर्वजों की पूजा
  • इन सभी से घर में सौभाग्य, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है।
4. पूजाघर में ऊर्जा संतुलन के उपाय
पूजा स्थल में सुबह-शाम नियमित दीपक जलाना और शंख अवश्य रखना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में सुख-सौहार्द का वातावरण बनता है। इसके साथ ही पूजाघर में हल्का हरा, पीला, जामुनी या क्रीम जैसे सात्विक रंगों का प्रयोग करने से मन को शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।

5. पूजाघर से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियां
  • पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • पूजाघर के ऊपर या नीचे शौचालय नहीं होना चाहिए।
  • पूजाघर में महाभारत की प्रतिमाएं, प्राणी-पक्षियों के चित्र या दिवंगतों की तस्वीरें न रखें।
  • पूजा स्थल में धन-संपत्ति छुपाकर रखना अशुभ माना गया है।
  • खंडित मूर्तियां या तस्वीरें पूजाघर में नहीं होनी चाहिए।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने कमरे का प्रयोग पूजा-अर्चना के लिए नहीं करना चाहिए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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