वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार के साथ-साथ बाउंड्री वॉल (कंपाउंड) के बाहरी गेट का भी विशेष महत्व बताया गया है। यह वही गेट होता है जिसे खोलकर व्यक्ति सबसे पहले घर के परिसर में प्रवेश करता है। मान्यता है कि इसी मार्ग से घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए गेट की दिशा का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार किस दिशा में कैसा गेट शुभ माना जाता है।
उत्तर दिशा में गेट
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर देव हैं, जिन्हें धन का देवता माना जाता है। यदि प्लॉट या मकान उत्तरमुखी है तो बाहरी गेट उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) की ओर रखना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे आर्थिक उन्नति, नए अवसर और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। ध्यान रखें कि गेट उत्तर-पश्चिम की अपेक्षा उत्तर-पूर्व की ओर अधिक शुभ माना जाता है।
पूर्व दिशा में गेट
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य देव हैं। यदि घर पूर्वमुखी है तो गेट पूर्व या पूर्व-उत्तर (ईशान) भाग में बनवाना श्रेष्ठ माना जाता है। वास्तु के अनुसार इस दिशा में बना गेट घर में सकारात्मक ऊर्जा, यश, मान-सम्मान और अच्छे स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। साथ ही घर के सदस्यों की सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होने की मान्यता है।
दक्षिण दिशा में गेट
दक्षिण दिशा को सामान्यतः कम शुभ माना जाता है, लेकिन यदि प्लॉट दक्षिणमुखी है तो गेट दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) भाग की ओर बनाना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में गेट बनाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वास्तु मान्यता के अनुसार इससे आर्थिक अस्थिरता, तनाव और बाधाएं बढ़ सकती हैं। यदि किसी कारणवश दक्षिण दिशा में ही गेट हो, तो वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उचित उपाय करना उचित माना जाता है।
पश्चिम दिशा में गेट
पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव माने गए हैं। यदि मकान पश्चिममुखी है तो गेट पश्चिम-उत्तर (वायव्य) भाग में बनाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में स्थिरता, कार्यों में सफलता और पारिवारिक सहयोग प्राप्त होता है। वहीं पश्चिम-दक्षिण (नैऋत्य) भाग में गेट बनाना शुभ नहीं माना जाता।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- मुख्य बाहरी गेट हमेशा मजबूत, साफ-सुथरा और अच्छी स्थिति में होना चाहिए।
- गेट खोलने या बंद करने पर तेज आवाज नहीं आनी चाहिए।
- गेट के सामने बिजली का खंभा, बड़ा पेड़ या कोई अवरोध हो तो उसे वास्तु की दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता।
- गेट के आसपास पर्याप्त रोशनी रखें, क्योंकि अंधेरा नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।