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वास्तु उपाय: जानिए वास्तु में क्यों मान्य नहीं है सोने के लिए उत्तर दिशा

Tue, 04 Aug 2020 11:42 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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वास्तुशास्त्र में कहा गया है कि गहरी नींद में हम शक्ति स्रोतों से पुनः जुड़ते हैं। यही जुड़ाव शांत और अपने अस्तित्व के प्रति प्रसन्न व उत्साहित करता है। गहरी नींद सोकर सुबह तरोताज़ा होकर जागने पर आप नए दिन के लिए तैयार व तत्पर रहते हैं। आप कितनी देर सोते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है, जरूरी यह है कि कितनी गहरी और अबाधित नींद आती है। शांत व निर्विघ्न नींद के लिए वास्तु में सोने के कुछ नियम दिए गए है, जिनको अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ्य व सक्रिय जीवन जी सकता है।

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क्यों नहीं सोयें उत्तर दिशा में   

वैज्ञानिक परीक्षणों से यह स्पष्ट हो चुका है कि मनुष्य का शरीर चुम्बकीय तरंगों से प्रभावित होता है एवं स्वयं सूक्ष्म चुम्बकीय तरंगों को फेंकता भी है जो प्रभामंडल में आकर्षण एवं विकर्षण उत्पन्न करती हैं। जिस प्रकार पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव है ठीक उसी प्रकार से मनुष्य शरीर का मस्तिष्क वाला हिस्सा उसका उत्तरी पोल माना गया  है। अतः सम्पूर्ण सुखद विश्राम के लिए मनुष्य का सिर वाला हिस्सा सदैव दक्षिण ध्रुव की और रहना चाहिए ताकि चुम्बकीय तरंगें सही दिशा में प्रवाहित हो सकें। इसके विपरीत उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से चुम्बकीय प्रवाह अवरुद्ध होकर बिगड़ जाएगा जिस कारण मनुष्य को ठीक से नींद नहीं आ पाएगी। वास्तु के अनुसार इस दिशा में सिर करके सोने से नींद बाधित होती है जिस कारण सिरदर्द रह सकता है। जो लोग उत्तर की तरफ सिर एवं दक्षिण की तरफ पैर रखकर सोते हैं ऐसे लोग रातभर करवटें बदलते रहेंगे, सुबह उठकर भी आलस्य बना रहेगा।मानसिक बीमारियों की संभावना बढ़ जाएगी अतः वास्तु की मानें तो इस दिशा में सिर करके कभी न सोएं।

आध्यात्मिकता एवं एकाग्रता के लिए पूर्व दिशा

वास्तु शास्त्र में देवताओं के राजा इंद्र को पूर्व दिशा के स्वामी माना गया है। प्रातः जागते ही इस दिशा के दर्शन करने से देवेंद्र से अपनी सम्पन्नता के लिए आशीर्वाद लेने के समान पुण्यकार्य है। इस दिशा में सिर करके सोने से स्मृति, एकाग्रता एवं  स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है और मनुष्य का आध्यात्मिकता के प्रति झुकाव बढ़ता है। वास्तु के अनुसार छात्रों को स्मृति में वृद्धि एवं एकाग्रता बढ़ाने के लिए पूर्व दिशा में सिर करके सोना लाभकारी हो सकता है।

पश्चिम दिशा का प्रभाव

जल के अधिपति देवता वरुण पश्चिम दिशा के स्वामी कहे गए हैं जो हमारी आत्मा, आध्यात्मिक भावना एवं विचारों को प्रभावित करते हैं। वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा में सिर करके सोना भी अनुकूल है क्योंकि यह दिशा नाम, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा और समृद्धि को बढ़ाती है।
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धन, खुशी,समृद्धि के लिए दक्षिण दिशा  

मृत्यु के देवता यम दक्षिण दिशा के स्वामी हैं। इस दिशा में सिर करके सोना सबसे अच्छा है। वास्तु में कहा गया है कि स्वस्थ जीवन एवं लंबी आयु चाहने वाले मनुष्य को सदैव अपना सिर दक्षिण में एवं पैर उत्तर दिशा की ओर करके सोना चाहिए'। इस दिशा की ओर सिर करके सोने से व्यक्ति को धन, ख़ुशी,समृद्धि एवं यश की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त व्यक्ति गहरी नींद में आराम से सोता है।
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