वास्तु शास्त्र में कई तरह के दोषों के बारे में विस्तार से बताया गया है, जिसका सीधा संबंध घर की ऊर्जा, वातावरण, सेहत, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति से ऊपर देखने को मिलता है। आज हम आपको वास्तु दोषों में एक दोष भूमि के दोष के बारे में बताने जा रहे हैं।
वास्तु शास्त्र ज्योतिष की एक बहुत ही प्रमुख विद्या होती है। वास्तु शास्त्र में किसी स्थान पर मौजूद सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह की ऊर्जाओं का अध्ययन करके उसके बारे में जानकारी दी जाती है। घर पर वास्तु दोष होने पर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है वहीं अगर किसी घर का वास्तु अच्छा है तो जीवन सुख और समृद्धि से भरपूर होता है। आपको बता दें कि वास्तु शास्त्र में कई तरह के दोषों के बारे में विस्तार से बताया गया है, जिसका सीधा संबंध घर की ऊर्जा, वातावरण, सेहत, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति से ऊपर देखने को मिलता है। आज हम आपको वास्तु दोषों में एक दोष भूमि के दोष के बारे में बताने जा रहे हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस भूमि में वास्तु दोष होता है वहां पर निर्माण करने पर घर में रहने वाले लोगों के जीवन में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार भूमि की तीन तरह की प्रवृत्ति होती है। पहली जागृति, दूसरी सुप्त और तीसरी मृत भूमि। जागृत भूमि को सबसे शुभ, अच्छी और सफलता देने वाली मानी जाती है। सुप्त भूमि सामान्य फल और मध्यम फल वाली मानी जाती है वहीं मृत भूमि को अशुभ माना जाता है। यहां पर रहने वाले लोग या फिर व्यापार करने में हमेशा ही तनाव और आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं भूमि दोष के बारे में।
भूमि की प्रकृति कैसे करें मालूम
ज्योतिष शास्त्र में ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर भूमि के स्वभाव के बारे में कुंडली देखकर किया जाता है। भूमि के स्वभाव का पता शनि और गुरु के गोचर से मालूम होता है।
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भूमि दोष के लक्षण
-जिन भूमि में वास्तु दोष समेत दूसरे लक्षण होते हैं, वहां पर अगर पालतू जानवर बिना वजह के बीमार हो और असमय ही उनकी मौत हो जाय तो यह समझाना चाहिए कि घर में भूमि दोष है।
- अगर परिवार के सदस्यों के साथ अचानक दुर्घटना या फिर किसी तरह की अनहोनी होने लगे तो समझना चाहिए की भूमि में कोई न कोई दोष है।